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बड़ी खबर: हाई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ  सुप्रीम कोर्ट पहुंची उत्तराखंड सरकार

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संंवाददाता

देहरादून, 28 अक्टूबर। मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर  सीबीआई जांच कराए जाने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले ने उत्तराखंड में सियासी हलचल मचा दी है। रावत विरोधियों ने अचानक हाथ आए इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए उनके  इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है। दूसरी ओर हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने बुधवार को यहां एक पत्रकार वार्ता मेंं यह जानकारी दी। उन्होंने मामले का विस्तृत विवरण देेेते हुए कहा कि याचिकाकर्ता हरेंद्र सिंह रावत की ओर से उमेश शर्मा के खिलाफ दी गयी तहरीर के आधार पर केस किया गया है। मामले में साक्ष्य इकट्ठे किए जाने थे। लेकिन, हाईकोर्ट ने एफआईआर को निरस्त कर दिया। यह फैसला कानूनन गलत है। भाजपा फैसले से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि वे अदालत की आलोचना नहीं कर रहे हैं, फैसले की आलोचना करते हैं। चौहान ने हाईकोर्ट के फैसले को कानून की गलती बताते हुए उन्होंने कहा कि  फैसले के हाईकोर्ट के इस खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में  के  विशेष जनह‍ित याच‍िका (एसएलपी) दायर कर दी है।
मुन्ना सिंह चौहान, भाजपा प्रवक्ता
भाजपा प्रवक्ता मुन्ना सिंह  चौहान ने कहा कि उमेश शर्मा पर 5 राज्यों में करीब 2 दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। कई तरह के मामलों में वह आरोपी हैं। चौहान ने कहा कि औचित्यहीन शिकायतों के आधार पर जांच का कोई औचित्य नहीं बनता है। मुख्यमंत्री को इस पूरे मामले पर कोर्ट ने पार्टी नहीं बनाया, उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं हुआ, कभी सुना नहीं गया, फिर भी उनके खिलाफ निर्णय  दे दिया गया है। चौहान ने कहा कि यह फैसला तथ्यों से परे है। मुख्यमंत्री के खिलाफ किसी तरह का कोई केस ही नहीं बनता।
गौरतलब है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया था कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कर आरोपों की जांच की जाय। हाईकोर्ट ने यह आदेश पत्रकार उमेश शर्मा के खिलाफ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की छवि बिगाड़ने के आरोप में दर्ज मुकदमें में दिया। अपने फैसले में कोर्ट ने शर्मा के खिलाफ दायर मुकदमा की रद्द करने के आदेश दिए।
त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
ज्ञातव्य है कि देहरादून निवासी प्रो. हरेंद्र सिंह रावत ने 31 जुलाई 2016 को देहरादून में पत्रकार उमेश शर्मा व अन्य के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, बदनाम करने समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाया था। तहरीर में कहा गया था कि उमेश शर्मा ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया में खबर चलाई थी। खबर में कहा गया कि हरेंद्र सिंह रावत व उनकी पत्नी सविता रावत के खाते में नोटबंदी के दौरान झारखंड से किसी अमृतेश चौहान ने रुपए जमा करवाए। यह रुपए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को देने की बात कही गई थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि उनकी पत्नी मुख्यमंत्री की पत्नी की बहन नहीं हैं, जो भी तथ्य ख़बर में बताए गए हैं, वह पूरी तरह से गलत व झूठे हैं। प्रो रावत ने तहरीर में कहा कि उमेश शर्मा ने उनके बैंक के कागजात भी गलत तरीके से बनवाए, उनके बैंक खातों की सूचना गैरकानूनी तरीके से ली। मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार की ओर से उमेश शर्मा व अन्य लोगों के खिलाफ देशद्रोह, गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया था। तब इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।