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गड़बड़झाला: फर्जी दस्तावेजों से नौकरी कर रहे शिक्षकों के गले में कसता जांच का फंदा

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संवाददाता
देहरादून, 19 अक्टूूूबर। बेसिक और जूनियर शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की विभाग जांच करवाने जा रहा है। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों का अब विभागीय जांच से बचना मुश्किल होगा।
शिक्षा विभाग 35 हजार से ज्यादा बेसिक और जूनियर शिक्षकों के 10 वीं से बीएड तक के सर्टिफिकेट की जांच कराने जा रहा है। एक शिक्षक की केवल स्नातक की डिग्री जांचने के लिए 500 रुपये का खर्च आ रहा है। 10 वीं से बीटीसी,डीएलएड के प्रमाणपत्रों की जांच का खर्चा अलग है। इस तरह से शिक्षा विभाग पर आर्थिक बोझ भी बढ़ने जा रहा है। पूर्व में कुछ अधिकारियों ने गढ़वाल विवि को शिक्षकों की डिग्रियां भेजी थी। विवि ने कहा कि एक छात्र के दस्तावेजों की जांच को 500 रुपये शुल्क देना होगा। अधिकारी इसे मानद मद—27 और 42 से या विशेष सेवाओं के लिए भुगतान से भी खर्च कर सकते हैं। विदित हो कि हाईकोर्ट ने शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर चूक न हो। शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने सभी डीईओ को इसके आदेश कर दिए। इसके तहत राज्य बोर्ड से हाईस्कूल, इंटर, राज्य के डायट से बीटीसी,डीएलएड और राज्य के विवि से स्नातक, बीएड करने वाले शिक्षकों की जांच होगी। शिक्षकों से प्रमाणपत्र लेने के बाद डीईओ को इन सभी दस्तावेजों को बोर्ड, डायट और विश्वविद्यालय से प्रमाणित कराना अनिवार्य होगा।