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आवाज़: जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 28 अगस्त को केन्द्र सरकार व राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजेगी सीपीएम 

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संविधान बचाने  व धर्म निरपेक्षता की रक्षा को लेकर विभिन्न क्षेत्रों मेंं पार्टी चलाएगी  जनजागरण अभियान 
संवाददाता
देहरादून- माकपा ने अपने अगस्त अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में जनजागरण अभियान चला कर आम जनता से संविधान तथा धर्म निरपेक्षता की रक्षा का आह्वान किया है। इस मुुद्दे पर आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि केेंद्र सरकार संघ का एजेंडा लागू कर संविधान तथा देश की धर्म निरपेक्षता के साथ खिलवाड़ कर रही है। वक्ताओं ने कहा कि एक के बाद एक संवैधानिक संस्थाओं पर हमला जारी है।
  आज सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरोध में आवाज़ उठाने वालों के खिलाफ हो रही कार्यवाही जगज़ाहिर है। वक्ताओं ने कहा कि कोविड की आड़ में सरकार मनमानी पर उतर आई है। परिणामस्वरूप आज देश की सम्पति को चन्द घरानों के हवाले किया जा रहा है । मोदी सरकार अमेरिका परस्त नीतियों को अपनाकर पड़ोसी राष्ट्रों से सम्बन्ध तनावपूर्ण बना कर युद्धोन्माद की स्थिति पैदा कर रही है। कुल मिलाकर केंद्र की मौजूदा सरकार पूर्णतः विफल हो चुकी है । अब सरकार की जनविरोधी, साम्प्रदायिक तथा फूटपरस्त नीतियों के खिलाफ संघर्ष ही एक विकल्प रह गया है। ऐसे में
पार्टी जनता के सवालों पर जन अभियान चला रही है। अभियान के खास मुद्दे इस प्रकार हैंं-16 सूत्रीय मांग पत्र-
1. आज के हालात में 7500 रु प्रति माह अगले छह महीने तक हर उस परिवार को मिले, जो आयकर के दायरे में नहीं आते हैं.
2. 10 किलो अनाज़ अगले छह महीने तक हर ज़रूरतमंद व्यक्ति को दिया जाए.
3. ग्रामीण रोज़गार के दायरे को बढ़ाया जाए और 200 दिनों तक उन्हें काम दिया जाए । शहरी इलाक़ों में बेरोज़गार हुए लोगों के लिए भी नया नियम क़ानून बनाए जाएं और उन्हें भी काम दिया जाए।
4. मज़दूरों का हित बहाल हो।
5. पब्लिक हेल्थ पर ख़र्च को जीडीपी का कम से कम 3 फ़ीसदी तक बढ़ाया जाए।
6. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट को हटाएं। अनाज की मुक्त आवाजाही हो।
7. मज़दूर क़ानून पर जितने बदलाव हुए और लाने की कोशिश हुई उन्हेें ख़त्म किया जाए।
8. सरकारी कंपनियों और उद्यमों का निजीकरण बंद किया जाए।
9. पीएम केयर फंड के तहत जो राशि जमा हुई है, उसे राज्य सरकारों को दिया जाए, जो कोरोना से वास्तविक लड़ाई लड़ रही हैं ।
10. कोरोनावायरस के दौर में जिन लोगों की मौत हुई है, उन सबको एनडीआरएफ़ फंड से एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जाए।
11. दलित, आदिवासी, ओबीसी और विकलांगों के लिए आरक्षण लागू रहे। उसके साथ छेड़-छाड़ न हो। सारे रिक्त पदों पर जल्द से जल्द भर्तियां हों।
12. पिछले सेमेस्टर के हिसाब से उच्च शिक्षा में भी नतीजे तय होंं।
13. हिरासत में लिए गए राजनीतिक क़ैदियों को रिहा किया जाए। 2019 में कश्मीर में बड़े पैमाने पर गिरफ़्तार हुए लोगों को छोड़ा जाए।
14. 2020 में जो पर्यावरण एसेसमेंट हुआ, उसे रद्द किया जाए।
15. लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा को अंजाम देने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो।
16. दलितों और अल्पसंख्यों के ख़िलाफ़ हिंसा करने वालों पर भी सख़्त कार्रवाई हो।
रविवार को पार्टी राज्य कार्यालय के सभागार में राज्य सचिव राजेंद्र सिंह नेगी, राजेन्द्र पुरोहित, इन्दु नौडियाल, अनन्त आकाश, लेखराज, शम्भू प्रसाद मंमगाई, भगवन्त पयाल,  दमयन्ती नेगी, विजय भट्ट, नुरैशा, अकरम, अर्जुन रावत, शिवा दुबे, मनीष जैन, जब्बार, अनिल कुमार व सीमा आदि प्रमुख थे ।