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​तनातनी: निजी स्कूलों ने रखीं पांच शर्तें, बच्चों को स्कूल भेजने को राजी नहीं अभिभावक 

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गजे सिंह बिष्ट
देहरादून, 08 अक्टूबर। अभिभावकों और निजी स्कूल संचालकों के एकमत न होने के कारण निजी स्कूलों के खुलने का मामला अधर में लटक गया है। दरअसल,  केंद्र सरकार की गाइड-लाइन के अनुसार 15 अक्टूबर से स्कूल खोलने के लिए निजी स्कूल संचालकों ने पांच शर्तें रखी हैं। शिक्षा सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में बुधवार को डीएम, मुख्य शिक्षा अधिकारी की मौजूदगी में स्कूलों के प्रतिनिधियों संग वर्चुअल बैठक हुई। प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन की ओर से सरकार के सामने यह शर्तें रखी गईं- 
-स्कूल खोलने के एक सप्ताह बाद ही ऑनलाइन पढ़ाई बंद कर दी जाएगी।
-स्कूल खुलने पर जो फीस नहीं देंगे, एक अक्तूबर से लेट फीस देनी होगी
-स्कूल आते वक्त अभिभावकों को लिखकर देना होगा कि बच्चे की सुरक्षा के लिए ‘मैं जिम्मेदार हूं।’
-बच्चे को कोरोना होता है तो टीचर, प्रिंसिपल या प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
-निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी कोरोना वॉरियर्स घोषित किया जाए।
उधर दून के विभिन्न स्कूलों के अभिभावकों ने स्कूल खोलने का विरोध किया है। अभिभावकों ने निजी स्कूल प्रबंधन की शर्तों को गलत बताया है। उनका कहना है कि किसी भी हाल में बच्चे को स्कूल नहीं भेजा जाएगा। अगर निजी स्कूलों का रवैया नहीं बदला तो उन्हें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।