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जयंती: ‘पेशावर कांड’ के महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जयंती पर किया भावपूर्ण स्मरण

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 रश्मि खत्री

देहरादून, 25 दिसंबर। ब्रिटिश हुकूमत की फौज में होते हुए भी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पेशावर में निहत्थे आंदोलनकारियों पर गोली चलाने से इनकार कर देने और इस हुक्मअदूली के लिए काला पानी की उम्रकैद भुगतने वाले चंद्रसिंह भंडारी (गढ़वाली) की आज 129 वीं जयंती है। ‘पेशावर कांड के नायक’  और वीर ‘गढ़वाली’ के नाम से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले हवलदार चंद्र सिंह गढ़वाली की 129 वीं जयंती पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का  भावपूर्ण स्मरण  करते हुए कहा कि आज़ादी के आंदोलन में ‘पेशावर कांंड’ एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में पेशावर कांड के महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का अग्रणी योगदान रहा है। निहत्थे आंदोलनकारियों पर गोली चलाने से इंकार कर गढ़़वाली ने महान देेेशभक्ति का परिचय दिया।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में यह घटना मील का पत्थर साबित हुई, जिसने भविष्य के लिए एक  मजबूत आधारशिला रखी। स्वतंत्रता आंदोलन में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों के योगदान को  अद्वितीय और अविस्मरणीय बताते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि भारत के स्वतंंत्रता  आंदोलन के इतिहास में ‘पेशावर कांड’ स्वर्णिम  अक्षरों में दर्ज है।
 उधर, यूकेडी ने भी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का सम्मानजनक स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यहां कचहरी रोड स्थित पार्टी कार्यालय में  आयोजित कार्यक्रम में पार्टी की ओर से गढ़वाली की वीरता और आज़ाद  के प्रति उनके जुनून और प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि उनके इस कार्य से न केवल उत्तराखंड का बल्कि पूरे देश का सर ऊंचा हुआ है। गौरतलब है कि  चंद्र सिंह गढ़वाली का जन्म 25 दिसम्बर 1891को पौड़ी गढ़वाल के राठ क्षेत्र में हुआ। 1914 में रॉयल गढ़वाल राइफल्स में भर्ती होने के बाद उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने अपनी पहचान 23 अप्रैल 1930 को बनायी, जब हवलदार मेजर वीर चंद्र सिंह गढ़वाली रॉयल गढ़वाल राइफल्स का नेतृत्व पेशावर में कर रहे थे।

 अंग्रेज अफसर ने जब पठानों के ऊपर गोली चलाने का आदेश दिया तो जवानों की टुकड़ियों का नेतृत्व कर रहे गढ़वाली ने निहत्थेे आंदोलनकारी पठानों के ऊपर गोली चलाने से मना कर दिया। यहीं से वीर चंद्र सिंह  गढ़वाली हिंदुस्तान के इतिहास मेंं पेशावर कांड के नायक बन गये थे। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पृथक उत्तराखंड राज्य के सबसे बड़े पक्षधर थे। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से भी गढ़़वाली ने पर्वतीय भूभाग उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने का  आग्रह किया था  । वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राज्य की राजधानी दूधातोली में बनाए जाने की बात करते थे, जो गैरसैण परिक्षेत्र के नजदीक है। उत्तराखंड क्रान्ति दल ने पेशावर कांड के नायक  को सम्मान देते हुये सन 1992 में राजधानी का ब्लू प्रिंट जारी किया, तो राज्य की राजधानी गैरसैंण को घोषित किया। वहां का नाम भी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर ‘चंद्रनगर’ गैरसैंण रखा गया था। शुक्रवार को उनके 129 वें जन्मदिवस पर यूकेडी ने सरकार से अपनी मांग दोहराई कि गढ़वाली  के नाम पर गैरसैंण का नाम चंद्रनगर करने के साथ ही वहां उत्तराखंड की स्थायी राजधानी स्थापित की जाय।
   कार्यक्रम में लताफत हुसैन,जय प्रकाश उपाध्याय,सुनील ध्यानी, शकुंतला रावत, धर्मेंद्र कठैत, बिजेंद्र रावत, अशोक नेगी, किरन रावत कश्यप, राजेन्द्र प्रधान, अरविंद बिष्ट, गणेश काला व नरेश गोदियाल आदि शामिल थे। हालांकि बात बात पर आए दिन प्रेेेस कांफ्रेंस कर मीडिया में अपना चेहरा चमकाने वाले पार्टी के अधिकतर बड़बोले नेता   कार्यक्रम से दूर ही रहे।