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टिप्पणी विवाद: ‘करे कोई,भरे कोई’, भगत के बदले सीएम रावत ने मांगी नेता प्रतिपक्ष से क्षमा

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संवाददाता

देहरादून, 6 जनवरी। उत्तराखंड में राजनैतिक विद्वेष और दुराग्रह अब मर्यादा का चीरहरण करने लगे हैं। हद ये हो गई है कि सभा में लोगों की तालियां बटोरने की तलब में नेता महिलाओं की गरिमा पर भी चोट करने से नहीं चूक रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत के द्वारा नेता प्रतिपक्ष वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ इंदिरा हृदयेश पर की गई ऐसी ही एक अभद्र और विवादित टिप्पणी ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। हालांकि राजनीतिक शालीनता और बड़प्पन का परिचय देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस टिप्पणी के लिए नेता प्रतिपक्ष से क्षमा मांग कर मामले को थोड़ा शांत करने की कोशिश की है। लेकिन उनका यह प्रयास ‘करे कोई, भरे कोई’ की कहावत को ही चरितार्थ कर रहा है। प्रदेश की राजनीति में पहली बार ऐसा हुआ है, जब अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के अमर्यादित बयान के लिए पार्टी नेताओं की बजाय  मुख्यमंत्री ने विपक्षी दल के नेता से माफी मांगी हो। दरअसल, मंगलवार को नैनीताल जिले के भीमताल विधानसभा में कार्यकर्ताओं के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए बहुत अभद्र और विवादित टिप्पणी कर दी थी। उसके बाद सियासी हलकों में भूचाल आ गया और हर तरफ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान की कड़ी आलोचना होने लगी।
अध्यक्ष की इस करतूत से पार्टी की थू-थू होती देख कर भाजपा ने भले ही चुप्पी साध ली है, लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बड़ा दिल दिखाते हुए राजनीतिक शालीनता और मर्यादा का परिचय दिया और  तत्काल ट्वीट कर कहा है कि वह इस घटना को लेकर अत्यंत दुखी हुए हैं। उन्होंने इस प्रकरण के लिए इंदिरा हृदयेश से क्षमा मांग ली। भगत के इस बयान के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रियाएं आने लग गईं। मामला अभी-अभी स्वस्थ होकर लौटे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के संज्ञान में आया तो उन्होंने ट्वीट के जरिये बयान से हुए नुकसान की भरपाई की  करने की कोशिश की। उन्होंने ट्वीट कर भगत के बयान पर दु:ख जताया और व्यक्तिगत रूप से क्षमा मांगी। उन्होंने ट्वीट किया है-
‘मैं दु:खी हूं, क्षमा चाहता हूं, आपसे व्यक्तिगत बात करूंगा। 
आदरणीय इंदिरा हृदयेश बहन जी, आज मैं अति दुखी हूं। महिलाएं हमारे लिए अति सम्मानित व पूज्या हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से आपसे व उन सभी से क्षमा चाहता हूं जो मेरी तरह दुखी हैं। मैं कल आपसे व्यक्तिगत बात करूंगा और पुन: क्षमा याचना करूंगा।’
यह मातृ शक्ति का अपमान है: इंदिरा
‘मुझे यह जानकारी मिली है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने मेरे लिए अमर्यादित और अशिष्ट भाषा का प्रयोग किया है। इससे मुझे बहुत दुख और कष्ट हुआ है। किसी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष पूरी पार्टी का प्रतीक होता है और प्रतिनिधित्व करता है। प्रदेश अध्यक्ष अगर इस तरह की भाषा का प्रयोग करे तो यह उत्तराखंड नहीं पूरे देश में माताओं और बहनों का अपमान है। भारतीय संस्कृति का दावा करने वाले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने जिस तरह से नारी शक्ति का अपमान किया है उसे देश, पहाड़ और उत्तराखंड की नारी बर्दाश्त नहीं करेगी।
 प्रदेश की सरकार, प्रधानमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को इसका संज्ञान लेना चाहिए और भगत से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात करते हो तो अपनी भाषा सुधारो। भाषा जिनकी अशिष्ट होगी, नारियां उनके पास जाने से परहेज करेंगी। घर और बाहर की नारियां नाराज रहेंगी। इस तरह की भद्दी भाषा बोलने की अपेक्षा भाजपा नेतृत्व से नहीं करती हूं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मेरी मांग है कि इसे गंभीरता से लें और इसके लिए भगत से माफी मांगने को कहें।’
उधर,  पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता हरीश रावत ने एक बार फिर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की तारीफ की है। इंदिरा हृदयेश के लिए जिस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत ने किया उस पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बिना देर लगाए माफी मांगते हुए जहाँ अपना बड़प्पन दिखा दिया, वहीं कहीं न कहीं बंशीधर को एक सन्देश भी दे दिया। हरीश रावत ने सीएम के माफी मांगने पर खुशी जताते हुए कहा है कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पार्टी को फजीहत से बचा लिया। नर्सिंग प्रकरण पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के फैसले की भी हरीश रावत ने तारीफ की है।