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राज-काज: पिरूल को रोजगार से जोड़ने पर सीएम रावत का खास जोर, 40 हजार लोगों की आय बढ़ाने का लक्ष्य

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संंवाददाता 

देहरादून, 16 अक्टूबर।

मुुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पिरूल को रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है। इसके लिए उन्होंने सीएम सौर स्वरोजगार योजना के तहत पिरूल से बिजली बनाने की योजनाएं शुरू कराई हैं। मुख्यमंत्री स्वयं इन योजनाओं  की निगरानी कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री ने इस सिलसिले में योजनाओं की समीक्षा करते हुए बताया कि पिरूल नीति से 40 हजार से अधिक लोगों के आय के संसाधन बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। सीएम रावत ने कहा कि इस नीति के सफल क्रियान्वयन पर जिलाधिकारियों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इससे बिजली उत्पादन के साथ ही पिरूल एकत्रीकरण से स्थानीय स्तर पर महिलाओं के आय के संसाधन बढ़ रहे हैं। सीएम त्रिवेंद्र रावत ने सभी डीएम को विडियो कांफ्रेंस के जरिए निर्देश दिए कि सोलर, पिरूल योजनाओं में डीएम की अहम भूमिका है। गौरतलब है कि

कभी उत्तराखंड में जो पिरुल जंगलों के लिए अभिशाप बना था, वही, आज ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है। सरकार ने पिरुल एकत्रित करने के लिए प्रोत्साहन राशि 100 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति कुंतल कर दी है। डेढ़ सौ रुपये में बिजली उत्पादन और कोयला बनाने वाली कंपनियां पिरुल खरीदेंगी। जाहिर सी बात है लोगों को एक कुंतल पिरुल के 350 रुपये मिलेंगे। इसे कई तरह के फायदे हैं। जंगलों में आग न लगने से इमारती लकड़ी, पशुओं का चारा सुरक्षित रहेगा। युवा बेरोजगार ग्रामीणों की आजीविका में बढ़ोत्तरी होगी। सबसे अहम बात यह है कि उत्तराखंड के 16 फीसदी हिस्से में चीड़ के वन हैं, चीड़ के पत्ते पसरे होने से आगजनी की घटनाएं होती हैं। जिस कारण अन्य वनस्पतियां भी जलकर नष्ट हो जाती हैं। इन चीड़ के पेड़ों से हर साल 23 लाख मीट्रिक टन पिरुल निकलता है। रोजगार देने की मंशा से सरकार अक्षय ऊर्जा अभिकरण के मार्फत बिजली उत्पादन और कोयला बनाने के प्रोजेक्ट संचालित कर रही है। प्रोत्साहन राशि बढ़ाने से उम्मीद की जा सकती है। अब अधिक मात्रा में पिरुल एकत्रित होगा। जंगलों की आग पर अंकुश लगेगा।