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राज-काज: आपदा को लेकर सीएम गंभीर, संबंधित विभागों व डीएम को दिए त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश

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संवाददाता

देहरादून- उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते आपदा की घटनाओं में आ रही तेजी को लेकर सरकार की चिंताएं भी बढ़ रही हैं। इस संंकट से निपटने के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। स्वयं मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत इस पूरे अभियान पर पैनी नज़र रखे हुए हैं। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री ने सचिवालय में जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आपदा कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आपदा की दृष्टि से सभी जनपद अलर्ट रहे। जब बारिश के बाद धूप आती है, तो ऐसे समय में लैण्ड स्लाइडिंग की समस्याएं बहुत अधिक होती है। आपदा से जो सड़कें बाधित हो रही हैं, उन्हें सुचारू करने के लिए कम से कम समय लिया जाय। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी एवं अन्य आवश्यक उपकरणों की 24 घण्टे व्यवस्था रखी जाये आपदा।

मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि आपदा से होने वाली जन हानि में उनके परिवारजनों को 03 दिन के अन्दर अनुमन्य सहायता राशि उपलब्ध कराई जाये । आपदा के दौरान जिन लोगों को अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है, उनके रहने, खाने की उचित व्यवस्था हो।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को निर्देश दिये कि जनपदों में लैण्ड बैंक के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जाये , ताकि आवश्यकता पड़ने पर आपदा प्रभावितों को विस्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों को भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर विस्थापित करने के लिए भूमि का उपलब्ध होना जरूरी है। ऐसे गांवों की सूची बनाई जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों के लोगों के लिए विस्थापित करने के लिए फारेस्ट की भूमि की मंजूरी के लिए प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा जायेगा। उन्होंने जिलाधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर भेजने को कहा।

इस अवसर पर सचिव आपदा प्रबंधन एस. ए मुरूगेशन ने जानकारी दी कि जनवरी 2020 से प्राकृतिक आपदा के कारण राज्य में 62 लोगों की मृत्यु हुई है, 33 घायल हुए जबकि 04 लोग लापता हैं। 357 छोटे एवं बड़े पशुओं की हानि हुई। 237 भवन तीक्ष्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए। मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग भी क्षतिग्रस्त हुए, राष्ट्रीय राजमार्गों को अधिकतम 24 घण्टों के अन्दर सुचारू कर दिया गया। पिथौरागढ़ जनपद के तहसील बंगापानी के गैला, पत्थरकोट, बाता, टांगा एवं सिरतोल में अतिवृष्टि के कारण मलबा आने से सबसे अधिक नुकसान हुआ। आपदा मोचन निधि में भारत सरकार से वित्तीय वर्ष 2020-21 प्रथम किश्त के रूप में राज्य सरकार को 468.50 करोड़ रूपये का मानकीकरण किया गया है। जिलाधिकारियों को 103 करोड़ रूपये का एसडीआरएफ का बजट आवंटन किया गया एवं आपदा से संबंधित कार्यों के लिए अन्य विभागों को 189.88 करोड़ रूपये के एसडीआरएफ बजट का आवंटन किया गया।  हर जिलाधिकारी को आपदा मद में 5-5 लाख रूपये की अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी।

इस अवसर पर मुख्य सचिव  ओम प्रकाश, सचिव  अमित नेगी, डॉ. पंकज पाण्डेय, आईजी  संजय गुंज्याल एवं वीसी के माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।