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आक्रोश: केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ वामपंथी दलों  ने मनाया राष्ट्रव्यापी काला दिवस

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संवाददाता
देहरादून, 26 मई। वामपंथी दलों ने केंद्र सरकार पर जनविरोधी नीतियां लागू करने का आरोप लगाते हुए उनका विरोध शुरू कर दिया है। इसी विरोध के चलते उत्तराखंड में किसान सभा , सैन्टर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू), ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमन एसोसिएशन (एआईडब्ल्यूए), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने आज 26 मई का दिन राज्यव्यापी  काला दिवस के रूप में मनाया। इस दौरान उन्होंने संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के राष्ट्रव्यापी आह्वान के साथ एकजुटता का इज़हार भी किया। पार्टी नेताओं के अनुसार, 26 मई को किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष  के 6 महीने पूरे होने पर उत्तराखण्ड के विभिन्न जिलों देहरादून ,पौड़ी ,हरिद्वार ,चमोली ,रूद्रप्रयाग, टिहरी, अल्मोड़ा ,उधमसिंहनगर आदि जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए काले झण्डे लगाकर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों व कार्यवाही का जोरदार विरोध किया गया। इस कार्यक्रम में अन्य मज़दूर संगठनों ने भी भागेदारी की। उनका कहना था कि आज के दिन  श्रमिक संघों की अखिल भारतीय हड़ताल के  6 महीने भी पूरे हुए और आज के ही दिन  मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा-आरएसएस की सरकार के 7 साल पूरे हुए, जो स्वतंत्र भारत में सबसे दिवालिया, बेरहम, सांप्रदायिक, जनविरोधी और कॉरपोरेट समर्थक सरकार साबित हुई है। पार्टी नेताओं के अनुसार, किसान सभा ,सीटू , एडवा, डीवाईएफआई और एसएफआई मोदी सरकार के अपराधिक दोष और कोविड महामारी से निपटने में उसकी विफलता के लिए उसकी घोर निंदा करते हैं । उन्होंने प्रधानमंत्री को  देश के लोगों की  पीड़ा के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है । वामपंथी पार्टियों ने तीन जन विरोधी कृषि कानूनों और चार कामगार विरोधी श्रम संहिताओं को तत्काल निरस्त करने की मांग दोहराई है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि घरों और वाहनों के ऊपर काले झंडे लगाकर तथा गांवों और बस्तियों में आज़ का दिन विरोध दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर प्रर्दशनकारियोंं ने अपनी  निम्नलिखित मांगें  रखीं-

1- ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाएं और अस्पताल के बिस्तर उपलब्ध कराने के लिए पीएम केयर फंड का बडे़ पैमाने पर इस्तेमाल किया जाये। सेंट्रल विस्टा परियोजना को तत्काल रोका जायेऔर उसी उद्देश्य के लिए अपने धन का उपयोग किया जाये।
2- सभी देश वासियों को मुफ्त में कोविड स्वास्थ्य सुविधाएं दी जायें। सभी का निशुल्क और सार्वभौमिक टीकाकरण हो।
3- सख्ती से निजी अस्पतालों का अधिग्रहण किया जाये जिससे सभी रोगियों को लाभ हो।
4- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत बनाने के लिए पर्याप्त धन आवंटित करें ।
5- उन सभी परिवारों के खातों में 7500 रुपये तुरंत ट्रांसफर किये जायें जो आयकर या इन्कम टैक्स नहीं देते।
6- सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से दाल, तेल, चीनी आदि आवश्यक वस्तुओं के साथ-साथ छह महीने तक सभी जरूरतमंदों को 10 किलो मुफ्त अनाज दें।
7- काम का विस्तार किया जाये  , मनरेगा में मजदूरी बढ़ाई जाये , शहरी रोजगार गारंटी योजना शुरू की जाये।
8- निजी क्षेत्र में नौकरी के नुकसान के लिए पर्याप्त मुआवज़ा प्रदान करें।
9- सभी पंजीकृत बेरोज़गार युवाओं को बेरोज़गारी भत्ता प्रदान करें।
10- सेमेस्टर फीस सहित सभी फीस निरस्त की जाये। सभी गरीब और सामाजिक रूप से कमज़ोर छात्रों को सभी शैक्षिक सुविधाएं, आवश्यक गैजेट्स और इंटरनेट सेवाएं मुफ्त प्रदान की जाएं ।