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सियासत: सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सीएम रावत के विरोधियों के लिए बड़ा झटका मान रही है भाजपा

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संंवाददाता

देहरादून, 29 अक्टूबर।  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ दिए गए हाईकोर्ट के फैैैैैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक से उत्साहित भाजपा अब सीएम रावत के विरोधियों पर हमलावर हो गई है। पार्टी का मानना है कि गुरुवार को आए सुप्रीम  के आदेश से मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र सिंह रावत के विरोधियों को तगड़ा झटका लगा है। पार्टी ने हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख प्रतिक्रिया को  अपने तीखे हमलों का आधार बनाया है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान का कहना है कि जिस तरह से तल्ख टिप्पणी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे दिया है, उससे साफ है कि यह एक ईमानदार मुख्यमंत्री के खिलाफ गहरी साजिश थी।
गुरुवार को मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में  चौहान ने सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट का आभार जताया। उन्होंने कहा- ‘हमें भरोसा था, यह सुप्रीम कोर्ट में टिकेगा नहीं, जैसा कल हमने कहा था कि यह फैसला बहुत दोषपूर्ण है। फुल आफ लू पोल्स हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर तत्काल रोक लगाई। माननीय सर्वोच्च न्यायालय, मा. न्यायमूर्तियों ने हाईकोर्ट के फैसले पर जो तल्ख टिप्पणियां की (जो वेबसाइट पर हैं) हैैं, वो भी अपने आप में महत्वपूर्ण हैं।
चौहान ने कहा ने कहा कि ‘इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ कुछ था ही नहीं, इसलिए उन्हें राहत जैसी कोई बात नहीं है। तकनीकी रूप से सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाए जाने से वे लोग औंधे मुंह गिरे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ इस घृणित साजिश को अंजाम दिया।’
चौहान ने कहा कि जिम्मेदारी पूर्वक वह कांग्रेस पर एक गंभीर आरोप लगा रहे हैं। जिस तरह से कंधों पर चढ़कर कल से लेकर आज तक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, वरिष्ठतम नेता श्री हरीश रावत और अन्य नेता अधीर और उतावले होकर गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी कर रहे थे, उसने हमारी पार्टी को कुछ छानबीन को मजूबर किया। छानबीन के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आदरणीय  हरीश रावत के खिलाफ उमेश शर्मा का जो स्टिंग आपरेशन था, उसमें कांग्रेस ने उमेश शर्मा के साथ समझौता और घालमेल कर मुख्यमंत्री के खिलाफ दुर्भावना से प्रेरित होकर, राजनीतिक अनुचित लाभ के लिए, सीएम की छवि को बिगाड़ने के लिए इस षड्यंत्र में शामिल होने का कार्य किया।
चौहान ने कहा कि जब उमेश शर्मा ने  हरीश रावत का स्टिंग किया, तब हरीश रावत के इन्हीं पैरोकार ने हाईकोर्ट में कहा कि ये (उमेश शर्मा) ब्लैकमेलर है, विश्वास के लायक नहीं है। और अब उसी पैरोकार ने हाईकोर्ट में कहा कि यह साफ पत्रकार है। इसके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने  कांग्रेस से सीधे सवाल करते हुए उनसे जवाब मांगा। सवाल 1-  हरीश रावत क्या उमेश शर्मा को भला पत्रकार मानते हैं? 2- उसके खिलाफ आपराधिक मामलों को गलत मानते हैं? 3- वे ईमानदारी से पत्रकारिता का कार्य करते हैं?

उन्होंने कहा कि जहां तक मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र सिंह रावत की बात है,  उन्होंने पहले ही दिन से भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति के तहत काम किया। न केवल बयानों में, बल्कि उसे जमीन पर करके भी दिखाया। इससे सत्ता के गलियारों में अनैतिक सांठगांठ के आदी हो चुके लोग हैरान व परेशान हैं और उसका ही प्रतिफल मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ लगातार साजिश रची जा रही है।
एक सवाल के जवाब में  चौहान ने कहा कि वह निश्चित तौर पर प्रथण चरण से ही इस बात को मानते थे कि यह फैसला स्कूटनी में टिकेगा नहीं । हाईकोर्ट के फैसले पर मैंने हैरानी जताई थी, यह निर्णय नैसर्गिक न्याय के खिलाफ भी था। उमेश शर्मा के साथ मिलकर जिस तरह से कांग्रेस ने षड्यंत्र रचा, आने वाले चुनाव में कांग्रेस को डबल डिजिट भी क्रास नहीं कर पाएगी।