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सावधानः अब मोबाइल एप से भी हो रही है ठगी

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संवाददाता
देहरादून, 19 अक्टूूूबर। साइबर ठगों ने कोरोना संकट के दौरान ठगी करने का अंदाज बदल दिया है। लोगों को जरूरत के अनुसार कर्ज देने वाले मोबाइल एप की इस समय भरमार है।

लोगों को झांसा दे कर मोटी फीस ऐंठ कर चंपत हो जाने वाले तमाम एप लोगों के मोबाइलों तक पहुंच गये हैं। इन एप्स के जरिए लोगों को फौरन लोन दे देने के नाम पर मोटी फीस वसूली जा रही है। कोरोना संकट के मौजूदा दौर में जल्द से जल्द लोन पाने की चाहत रखने वाले लोग ऐसे झांसे में आकर आवेदन करते हैं। इस तरह के एप के जरिये 50,000 रुपये तक के कर्ज के लिए अक्सर 100 से 400 रुपये तक की फीस वसूली जाती है।
एप्सफ्लायर कंपनी के मुताबिक एशिया—प्रशांत क्षेत्र में इस वर्ष अब तक लोन देने वालों एप्स का सबसे अधिक इंस्टॉलेशन भारत में ही हुआ है। इससे रैपिड रूपी, मनी व्यू, अर्ली सैलरी समेत अन्य दर्जनों उन एप को खासा नुकसान हुआ है। जो सभी नियमों के अनुसार लोन देते हैं।

लोन लेते समय रखें सावधानीः
1. असली एप कर्ज की राशि में ही से प्रोसेसिंग फीस एडजस्ट करते हैं।
2. वास्तविक कर्ज प्रदाताओं के फोन, ई—मेल और पता भी दर्ज होता है। इसका सत्यापन कोई भी ग्राहक खुद वहां जाकर सकता है।
3. ग्राहकों को निर्णय लेने के लिए असली कर्जदाता पर्याप्त समय देते हैं।
4. कर्ज देने में गारंटी जैसी कोई बात नहीं होती है। वास्तविक कर्जदाता लोन देने से पहले पूरी तरह छानबीन करते हैं। जबकि ठगी करने वाले बिना किसी जांच के लोन देने की बात करते हैं।