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अनदेखी: पांच सालों से अधर में लटका है कृषि महाविद्यालय का भवन, शासन की सुस्ती से खफा हैं लोग 

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रामरतन सिह पंवार
जखोली (रुद्रप्रयाग) – सरकार एक ओर चिरबटिया को पर्यटन डिस्टिनेशन हब बनाने की पुरजोर कोशिश करने में लगी है। दूसरी ओर सरकार की यह भी मंशा रही है कि सीमान्त गांवों के गरीब परिवारों के बच्चों को कृषि के अन्तर्गत शिक्षा दिला सके। लेकिन जब यह मंशा समय से पहले दम तोड़ दे तो कैसे विश्वास किया जाय कि दूसरी योजना भी धरातल पर सही रूप में परिणित होगी?  उन्ही में एक योजना जखोली के सीमान्त क्षेत्र चिरबटिया मेेें कृषि महाविद्यालय की स्थापना की है। इस कृषि महाविद्यालय की स्थापना का मकसद यह था कि यहां नजदीक में  कोई कृषि महाविद्यालय न होने के कारण यहां के गरीब बच्चे इस विद्यालय मेें अध्ययन कर सकें,  लेकिन भवन निर्माण पूर्ण न होने के कारण यहां के छात्रों को टिहरी के रानीचौरी में पढ़़ेन हेतु प्रवेश लेना पड़ रहा है। बता दें कि वर्ष 2014-15 में जनपद रुद्रप्रयाग और टिहरी गढ़वाल की सीमा पर चिरबटिया में कृषि महाविद्यालय की स्थापना की गयी थी।चिरबटिया में कई वर्षों से उद्यान विभाग की खाली पड़ी जमीन लगभग 8,3 हैक्टेयर बताई जा रही है। सरकार ने इस जमीन को कृषि महाविद्यालय खोले जाने हेतु उपयुक्त स्थान मानकर चयनित किया। सरकार ने विद्यालय भवन निर्माण के लिये 25 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को स्वीकृति भी दे दी ताकि चिरबटिया में कृषि महाविद्यालय भवन का निर्माण कराया जा सके और बच्चे एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर सकें। भवन निर्माण के लिये सरकार ने कार्यदाई संस्था उत्तरप्रदेश निर्माण निगम को भवन निर्माण का जिम्मा दिया था। स्वीकृति के बाद प्रथम किस्त तो भवन निर्माण हेतु सरकार द्वारा जारी की गयी, मगर द्वितीय किस्त जारी नहीं होने से कृषि महाविद्यालय का भवन पांच सालों से अधर में लटका है। भवन निर्माण का कार्य पूर्ण न होने से इसका खामियाजा आज विद्यालय स्टाफ व छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में कृषि महाविद्यालय की कक्षाएँ रानीचौरी टिहरी में संचालित हो रही हैं। यदि सही समय पर भवन निर्माण हो जाता तो कक्षाओं का संचालन चिरबटिया में होने से क्षेत्र का महत्व भी बढ़ता और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता। ग्राम पंचायत लुठियाग के पूर्व प्रधान रूप सिंह मेहरा, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य श्रीमती लौंगा देवी पंवार, कमल सिंह मेहरा, उप प्रधान त्रिलोक सिंह कैन्तुरा, प्रधान दिनेश सिंह कैन्तुरा, पूर्व प्रधान सुबदेई देवी आदि का कहना है कि शासन को चिरबटिया में अधूरे भवन का निर्माण कार्य समय पर पूरा करवाना चहिए था ताकि छात्रों को चिरबटिया में प्रवेश दिया जा सके व स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल सके। सरकार को महाविद्यालय की अवशेष धनराशि यथाशीघ्र अवमुक्त करनी चहिए ताकि भवन को पूरा किया जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि कृषि महाविद्यालय की स्थापना से जिले को एक बड़ी उपलब्धि मिली थी।लेकिन पांच सालों से भवन का निर्माण कार्य पूरा न करवाने में क्षेत्रीय विधायक व सरकार नाकाम साबित हुई है। क्षेत्रीय जनता का कहना है कि अगर सरकार भवन निर्माण का कार्य यथाशीघ्र पूरा नहीं कराती है तो जनता को आंदोलन के लिये बाध्य होना पड़ेगा।