Home उत्तराखंड नाराजगी: आपदा प्रबंधन सचिव के खिलाफ हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, शासन की...

नाराजगी: आपदा प्रबंधन सचिव के खिलाफ हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, शासन की कार्यप्रणाली पर भी जताई नाखुशी

114
0

संवाददाता
नैनीताल, 19 नवंबर। गंगोत्री ग्लेशियर में फैल रहे कूड़े तथा इससे बनी झील को लेकर हाईकोर्ट ने शासन की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी प्रकट की है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए सचिव आपदा प्रबंधन के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करते हुए तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन सचिव पद एवं सरकारी नौकरी के योग्य नहीं हैं।
दरअसल, दिल्ली निवासी अजय गौतम ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2017 में हाईकोर्ट ने गंगोत्री ग्लेशियर में कूड़े कचरे की वजह से पानी ब्लॉक हो गया और कृत्रिम झील बन गई है। इससे बड़ी आपदा आ सकती है। याचिकाकर्ता के अनुसार इस मामले में सरकार ने पहले जवाब में माना था कि झील बनी है जबकि बाद में कहा था कि हैलीकॉप्टर के सर्वे के बाद देखा तो झील नहीं बनी है। 2018 में कोर्ट ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए सरकार को तीन माह में इसकी मॉनिटरिंग करने व छह माह में रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए थे मगर सरकार द्वारा कुछ नहीं किया गया। उसके बाद याचिकाकर्ता द्वारा फिर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा गंगोत्री ग्लेशियर के फोटोग्राफ आदि पेश किए गए। कोर्ट ने मामले में सरकार की हीलाहवाली पर सख्त नाराजगी प्रकट की। साथ ही सचिव आपदा प्रबंधन के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करते हुए तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता अजय गौतम का कहना है कि सरकार ने केदारनाथ आपदा में लापता लोगों के मामले में भी लापरवाही की। यही वजह है कि केदारनाथ आपदा के सात साल बाद भी नर कंकाल मिले थे। अब सरकार गंगोत्री ग्लेशियर के मामले में भी उदासीन रवैया अपना रही है।