Home उत्तराखंड हर हर गंगे: मकर संक्रांति पर हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए...

हर हर गंगे: मकर संक्रांति पर हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

140
0

 

अमित कुमार
हरिद्वार, 14 जनवरी।
मकर संक्रांति पर्व पर उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं में स्नान को लेकर उत्साह देखा गया। उत्तराखंड में हरिद्वार, ऋषिकेश सहित अन्य स्थानों पर गंगा घाटों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। वहीं, अन्य नदियों में भी श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया। घने कोहरे के बावजूद मकर संक्रांति पर हरिद्वार में हरकी पैड़ी सहित क्षेत्र के सभी स्नान घाटों पर ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं के स्नान का क्रम शुरू हो गया। हालांकि, कोविड-19 गाइडलाइन के चलते इनकी संख्या विगत वर्ष के अपेक्षा कम ही रही।


श्रद्धालु सुबह से ही गंगा स्नान के लिए स्नान घाटों पर पहुंचने लगे और हर हर गंगे जय मां गंगे के जय घोष के साथ मकर संक्रांति पर्व का पुण्य प्राप्त करने को गंगा में डुबकी लगाई। उन्होंने इसके साथ गंगा पूजन और दान पुण्य का लाभ भी अर्जित किया। इस दौरान हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड सहित स्नान घाटों पर स्नान के मद्देनजर कोविड-19 पालन होता नजर नहीं आया। कुछेक जागरूक श्रद्धालुओं को छोड़कर आमतौर पर शारीरिक दूरी और मास्क की गाइडलाइन का भी पालन भी नहीं दिखा। हालांकि, सभी जगहों पर प्रशासनिक कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती नजर आई। इन सबके बीच खास यह कि जैसे-जैसे दिन निकलता जा रहा है, वैसे-वैसे कोहरा बढ़ रहा है। साथ ही बढ़ रही है स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या। इसमें बच्चे बूढ़े महिलाएं और पुरुष सभी शामिल हैं।

इस बार है खास महत्व

इस वर्ष मकर संक्रांति पर्व का महत्व इसके गुरुवार को होने के कारण और भी बढ़ गया है। क्योंकि सूर्य, बृहस्पति और अन्य पांच ग्रहों के साथ षडग्रही योग बना रहा है। यह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर शर्मा शास्त्री के अनुसार इससे पहले 1962 में अष्ट ग्रहों का योग बना था और आठ ग्रहों की युति एक साथ हुई थी। इसके अलावा हरिद्वार में इस वर्ष गुम होने के कारण भी मकर संक्रांति पर्व का महत्व ज्यादा है। हालांकि, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और राज्य सरकार दोनों ने इसे कुंभ के स्नान का दर्जा नहीं दिया है।

मकर संक्रांति का महत्व
माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी भूलाकर उनके घर गए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से व्यक्ति का पुण्य प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है। इस दिन से मलमास खत्म होने के साथ शुभ माह प्रारंभ हो जाता है। इस खास दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है।