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जांचः फर्जी प्रमाणपत्र मामले में घिरे डिप्टी बीईओ राठौड़

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संवाददाता
देहरादून, 10 नवंबर। उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के एक सदस्य द्वारा लगाये गये गंभीर आरोप के चलते डिप्टी बीईओ नारसन बृजपाल सिंह राठौड़ के खिलाफ एक और जांच शुरू हो गई है। राठौड़ पहले से विभागीय जांच का सामना कर रहे हैं। अल्पसंख्यक आयोग सचिव ने जिलाधिकारी हरिद्वार को पत्र लिख कर इस प्रकरण में 15 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है।


उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग में आयोग के एक सदस्य असगर अली ने शिकायत की थी कि नारसन क्षेत्र के एक मदरसा के प्रबंधक और प्रधानाचार्य ने एक लड़की के माता—पिता सी मिलीभगत कर लड़की को बालिग दिखाने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर उनके भतीजे को झूठे मुकदमे में फंसाया।
उन्होंने शिक्षा विभाग से उक्त फर्जी प्रमाण पत्र की जांच कराए जाने का अनुरोध कियाए लेकिन जांच अधिकारी नारसन ब्लाक के डिप्टी बीईओ बृजपाल सिंह राठौड़ ने मदसा प्रबंधक और लड़की के माता—पिता से सांठगांठ कर इस फर्जी प्रमाण पत्र को अपनी जांच में सही ठहराया।
असगर अली ने अपनी शिकायत में कहा कि बाद में जब जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने प्रमाण पत्र की जांच की तो वह फर्जी निकला। शिकायतकर्ता का आरोप है कि डिप्टी बीईओ ने चार महीने तक जांच रिपोर्ट दबाकर रखी और बाद में फर्जी प्रमाण पत्र को सही बताय। जिस कारण उसका भतीजा पोक्सो एक्ट में आज तक जेल में बंद है। इस झूठे मुकदमे के कारण उसका भविष्य खराब हो गया है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के सचिव जेएस रावत ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में चार समिति का गठन करने को कहा है जिसमें एक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, एक अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारी और एक पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को शामिल किया जाए। शिकायत की जांच करवाकर 15 दिन में जांच रिपोर्ट आयोग को भेजने के निर्देश दिए सचिव द्वारा दिए गए हैं।