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मिसाल: ग्रामीण स्वरोजगार की अवधारणा को सच कर दिखाया  राजेंद्र सिंह बिष्ट ने…

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राजेंद्र सिंह बिष्ट ने किया 147 समूहों का गठन, जिन से 2007 महिलाएं जुड़ी हैंं
समूहों के लोग सब्जी उत्पादन, बकरी पालन व  दुग्ध उत्पादन से कर रहे हैं हर महीने लाखों की आय अर्जित 
सरकारी उदासीनता व अनदेखी से आहत हैं राजेन्द्र सिंह बिष्ट जैसे लोग  
दिलवर सिंह बिष्ट
 गंगोलीहाट-  कुछ लोग समाज मेंं ऐसे होते हैंं, जो लोगों की भलाई करने और उनकी थोड़ी सी मुस्कराहट में ही अपने जीवन को धन्य मानते हैं। फिर चाहे उन्हें कोई नाम, सम्मान व शोहरत मिले या न मिले। वह निरंतर अपने जीवन मेंं अच्छा करने की सोचते हैं और वैसा ही करते रहते हैं। चाहे इसका परिणाम उन्हें मिले या न मिले।
ऐसेे ही कर्मठ लोगों में से एक हैं गंगोलीहाट के राजेंंद्र सिंह बिष्ट,  जिन्होंने स्कूल के दिनों से ही मानव सेवा के संकल्प के साथ ही ग्रामीण तबके के गरीबों को रोजगार से जोड़ने के लिए तथा राज्य की मांग के लिये आंदोलनों में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। 53 वर्षीय राजेन्द्र सिंह बिष्ट का मुख्य उद्देश्य यह था कि ग्रामीण अंचलों से पलायन कर रहे लोगों को कैसे रोका जाय? उनकी रोजी-रोटी का प्रबंध कैसे हो ?
इसी मकसद को लेकर उन्होंने वर्ष 1992 में हिमालयन ग्राम विकास समिति गंगोलीहाट, पिथौरागढ़ बनाई  और इस समिति के माध्यम से क्षेत्र में 147 समूहों का गठन किया। इनमेंं 2007 महिलाओं को 8 स्वायत्त सहकारिता संगठनों से जोड़ कर डेयरी, बकरी पालन और सब्जी उत्पादन से आजीविका का संचालन करने की ओर मोड़ा, जिससे वह आज रोजगार के साथ-साथ आर्थिकी से भी स्वावलंबी बन गई हैं।
राजेन्द्र सिंह बिष्ट बताते हैं कि आज खुशी इस बात की है कि इन समूहों द्वारा दुग्ध डेयरी के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं प्रतिमाह 7 लाख रुपये से अधिक आय अर्जित कर रही हैंं। राजेंद्र सिंह बिष्ट को 14 जुलाई 2019 को कनखल हरिद्वार में उमेश डोभाल स्मृति सम्मान व 18 अक्टूबर 2019 को उत्तराखण्ड लोकमंच नई दिल्ली की ओर से समाज सेवा के लिए  उत्तराखण्ड गौरव सम्मान से नवाजा गया।
उन्होंने बताया कि गंगोलीहाट विकासखण्ड के विभिन्न कलस्टरों में व्यवसायिक तौर पर बकरी पालन में चाख क्लस्टर के 49 बकरी पालकों द्वारा रु. 1206050 लाख, टिम्टा कलस्टर में 49 बकरी पालकों द्वारा रु. 883700 लाख, राईगढस्यारी कलस्टर के 50 बकरी पालकों द्वारा रु 1127600 लाख व नाचनी कलस्टर के 12 बकरी पालकों द्वारा रु 429000 लाख की बकरी बेचकर कुल रु.3646350 लाख की आय अर्जित की गई। वहींं, सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में इस वर्ष चाख कलस्टर में 50 कास्तकारों द्वारा रु. 110000 लाख तथा टिम्टा कलस्टर में 25 कास्तकारों द्वारा रु. 84200 हजार कुल रु. 194200 लाख रुपये की सब्जी बिक्री कर आय अर्जित की गई। बिष्ट के मुताबिक, वर्ष 2019 से लेकर चाख व टिम्टा कलस्टर द्वारा कुल रु. 890345 लाख रुपये की सब्जी बिक्री की जा चुकी है।
आज राजेन्द्र सिंह बिष्ट की हिमालयन ग्राम विकास समिति गंगोलीहाट इतने तक ही सीमित नहींं है, बल्कि जल,जंगल व पर्यावरण से जुुुुुुुड़े  अनेकों रोजगार परक योजनाओं पर भी कार्य कर रही है। बहरहाल, सरकारोंं की उदासीनता व अनदेखी के चलते आज राजेन्द्र सिंह बिष्ट जैसे वर्षों से पलायन को रोकने के साथ गरीब तबके के लोगों को रोजगार व आर्थिकी से मजबूत बनाने वालों को मान-सम्मान व प्रोत्साहन से दरकिनार किया जा रहा है।
उत्तराखण्ड की सरकारों व जनता के लिये यह चिंतनीय विषय है।