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सवाल: कब तक गैर रहेगा गैरसैंण ? राजधानी के मुद्दे पर बंद हो अब सियासत

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राजेन्द्र बिष्ट
 गैरसैंण- उत्तराखंड को पृथक राज्य बनाये जाने की मांग को लेकर चले  लंबे जनांदोलन व शहादतों के बाद जब उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया तो यहां के निवासियों को लगा था कि प्रदेश भय व भ्र्ष्टाचार से मुक्त होगा, लेकिन प्रदेश की स्थिति और भी गम्भीर हो गई। तमाम जनहित के मुद्दे जहां हासिये पर धकेल दिए गए वहीं भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी ने आम गरीब लोगों का जीना दुश्वार कर दिया। शराब की पहुंच गांव गांव हो गई। युवा नशे की गिरफ्त में हैं, बेरोजगारी निरन्तर बढ़ रही है, जिसके चलते आम उत्तराखंडी स्वयं को ठगा महसूस कर रहा है।
3 अगस्त 1998 को केंद्र में तत्कालीन भाजपानीत सरकार के मंत्रिमंडल ने उत्तरांचल राज्य गठन को मंजूरी दी, जिस पर 7 दिसम्बर 1998 को राज्य विधेयक को हरी झंडी मिली व 1 अगस्त 2000 को लोकसभा व 10 अगस्त 2000 को राज्यसभा में प्रदेश गठन विधेयक पारित हुआ। जिस पर 28 अगस्त को राष्ट्रपति ने अधिसूचना जारी कर उत्तराखण्ड प्रदेश गठन का मार्ग प्रशस्त किया और अंततः 9 नवम्बर 2000 कोउत्तरांचल प्रदेश अस्तित्व में आया। तत्कालीन राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला ने सूबे के प्रथम सीएम के रूप में नित्यानंद स्वामी को शपथ दिलाई।

इस बीच प्रदेश की राजधानी को लेकर पहाड़वासी खुश नहीं थे, लिहाजा गैरसैंण को राजधानी बनाये जाने की मांग उठने लगी। प्रदेश के कोने कोने से आंदोलनकारी गैरसैंण आ कर प्रदर्शन, धरना व अनशन करते देखे गए, जिनका सरकार की शह पर पुलिसिया दमन होता रहा। किन्तु हासिल कुछ भी नहीं हुआ। बेनीताल में बाबा मोहन उत्तराखंडी अनशन के दौरान प्रशासन की उपस्थिति में शहीद हो गए, जिसकी आज तक जांच नहीं हो सकी। वहीं 2 वर्ष पूर्व गैरसैंण राजधानी की मांग कर रहे 32 आंदोलनकारी आज भी कोर्ट कचहरी के चक्कर काट रहे हैं। आंदोलनकारियों के मुकदमे वापस करना तो दूर सरकार उनकी बात सुनने को भी तैयार नहीं है।
दूसरी ओर 14 जनवरी 2013 को एक भब्य कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहगुणा ने विधानसभा अध्यक्ष गोबिंद सिंह कुंजवाल व सांसद सतपाल महाराज की उपस्थिति में गैरसैंण के भराड़ीसैण में विधान सभा, ट्रांजिट हॉस्टल व विधायक आवास का शिलान्यास कर पहाड़वासियों को विश्वास में लेने का प्रयोग किया। किन्तु कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं की अनुपस्थिति चर्चाओं में रही जब कि एक कैबिनेट  मंत्री भराड़ीसैण विधानसभा भवन में मकड़ी के जाले लगने जैसी टिप्पणी करते सुने गए। उसी कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट गैरसैंण को ग्रीष्म कालीन राजधानी व जिला बनाये जाने की मांग करते सुने गए। वर्तमान में 2 वर्षों से भाजपा सत्ता में है किंतु न ही राजधानी व ना ही जिला बनाये जाने की दिशा में कुछ होता नजर आ रहा है। यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड के भीतर ही पहाड़ी राज्य की मांग सिर उठाने लगे।