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तरकीब: राकेश गुसाईं ने निकाला कोरोना का तोड़, दून से ऑनलाईन पढ़ा रहे हैं चीन के बच्चों को

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देहरादून- एक गुरू के लिए सबसे दु:खद क्षण वो होता है कि जब वह किसी भी कारण से अपने शिष्यों को शिक्षा न दे पा रहा हो। इन्हीं हालातों से जूझ रहे चीन के शंघाई प्रांत में बच्चों को गणित पढ़ाने वाले एक अध्यापक को जब चीन वापसी का मौका नहीं मिला तो उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और देहरादून स्थित अपने घर से ही शंघाई में अपने छात्रों के लिए गणित की प्राब्लम साल्व कराने का नया फार्मूला ढूंढ निकाला। अब ये गुुुरू जी देहरादून में अपने घर से बच्चों को आन लाइन पढ़ाई करवा रहे हैं। इन गुरूजी का नाम हैै- राकेश गुसाईं। चीन में स्कूल के समय पर राकेश गुसाईं की कक्षाएं शुरू होती हैं। बच्चे उनसे अपनी समस्याएं पूछते हैं और राकेश यहां से उनकी समस्याओं का समाधान उन्हें बताते हैं। वे बताते हैं कि शंघाई में कोरोना का असर काफी कम दिखाई पड़ा। वहां मौतें भी कम हुईं लेकिन सावधानी के तौर पर उन्हें यह एहतियाती कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा़।
राकेश गुसाईं शंघाई में चलने वाले ए लेबल सेंटर में गणित के अध्यापक हैं। यहां बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा देने का प्रबंध है। राकेश गुसाईं से गणित पढ़े छात्र चीन के सर्वश्रेष्ठ बच्चों में भी शामिल हो चुके हैं। राकेश गुसाईं बताते हैं कि वे चीन में होने वाले स्प्रिंग फेस्टेवल की छुट्टियों पर अपने घर देहरादून आए थे। वैसे उनका परिवार देहरादून में ही रहता है लेकिन इस बार बेटी के स्कूल की छुट्टियां थीं तो पत्नी और बच्ची भी शंघाई गई थीं। 29 जनवरी को वे भारत पहुंचे तो कोरोना वायरस का खौफ एयरपोर्ट पर भी साफ दिखाई पड़ रहा था। उनकी मेडिकल जांच पड़ताल के बाद उन्हें देहरादून जाने दिया गया। यहां भी उत्तराखंड सरकार की मेडिकल टीम ने उनके स्वास्थ्य की जांच की और टीम के सदस्य लगातार उनके संपर्क में बने हुए हैं।