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फैसला: ज़मीन के फर्जीवाड़े में नप गए पूर्व मंत्री, कोर्ट ने सुनाई पंद्रह साल की सजा

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देहरादून- कुमाऊं मंडल के तराई क्षेत्र से एक बड़ी खबर आई है। वहां ज़मीन के फर्जीवाड़े में एक पूर्व मंत्री को कोर्ट ने पंद्रह साल की सजा सुनाई है।  10 करोड़ की संपत्ति पर फर्जी वसीयत बनाकर 35 एकड़ जमीन को अपने नाम करवाने के मामले में अदालत यह ने यह फैसला सुनाया है। आरोपी यूपी के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश हैं। उत्तराखंड सिविल जज सीनियर डिवीजन रूद्रपुर ने उन्हें दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई है। मामले के अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत मिली है।
मामला वर्ष 2014 का है, जब यूपी के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश , उनकी पत्नी गीता, पुत्र शिववर्धन व पुत्रवधू निधि  समेत पूर्व शासकीय अधिवक्ता स्वतंत्र बहादुर सिंह, उनकी पत्नी गीता देवी, पुत्रवधू शिखा देवी व वसीयत गवाह नवनाथ तिवारी व प्रेम नारायण  के खिलाफ फ्राड का मामला लिखा गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार आजाद हिंद फौज के सिपाही रामअवध सिंह आजादी के बाद पुलिस में भर्ती हुए और डिप्टी एसपी के पद से रिटायर हुए थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को उत्तर प्रदेश सरकार ने रुद्रपुर के बागवाला गांव में 50 एकड़ भूमि आवंटित की थी।
10 जून 1999 को रामअवध की मृत्यु के बाद उनकी बेटी प्रभावती के नाम वह संपति आ गई। भूमि विरासतन चकबंदी न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन उनके नाम दर्ज हुई। प्रभावती की शादी दूसरी जगह हो चुकी थी। इसलिए वह इस अपनी संपति की देखरेख करने को नहीं आ सकी।
इन्हीं परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए फर्जी वसीयतनामा तैयार कर उक्त जमीन को उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश  ने अपने नाम करा लिया।
बाद में इसका पता चला। मामला परत दर परत खुलता गया। शिकायतों पर भी सुनवाई नहीं हुई। लेकिन आखिरकार तीन मई 2014 को पुलिस ने केस दर्ज किया। 17 जून 2016 को धारा 420, 467, 468, 471, 504, 506, 342 व 120 बी में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। लंबी सुनवाई के बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन ने निर्णय दिया और आरोपी को सजा सुनाई।