Home उत्तराखंड बेमिसाल: आज देश को माणिक सरकार जैसे नेताओं की आवश्यकता है

बेमिसाल: आज देश को माणिक सरकार जैसे नेताओं की आवश्यकता है

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माणिक सरकार की सरकार को हराकर आज त्रिपुरा की जनता पश्चाताप की आग में जल रही है. माणिक सरकार 1998 से 2018 तक लगातार पांच बार त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रहे।
माणिक सरकार जैसे लोग भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं! इस अबूझ से सत्य को चमत्कार मानकर यकीन कर लिया। मगर देश को कभी दूसरा माणिक सरकार मिलेगा क्या? ये यकीन से भी परे है। अपना घर नहीं। कोई कार नहीं। एक भी अचल संपत्ति नहीं। उनकी पत्नी पांचाली भट्टाचार्या को साइकिल रिक्शा पर बैठकर बाजार जाते हुए देखना, त्रिपुरा के लोगों के लिए हमेशा एक आम सी बात रही।  ये उस दौर का सच है जहां एक अदने से अधिकारी की बीबी भी ब्यूटी पार्लर पहुंचकर सरकारी कार से तब उतरती है, जब अर्दली आगे बढ़कर दरवाजा खोलता है। बड़े नेताओं और सरकारी एंबेसडर वाले अधिकारियों की बात ही क्या। पांचाली भट्टाचार्य रिटायरमेंट तक सेंट्रल सोशल वेलफेयर बोर्ड में काम करती रहीं। जीवन में कभी भी किसी काम के लिए सरकारी गाड़ी का उपयोग नहीं किया। माणिक सरकार अपनी पूरी तनख्वाह पार्टी फंड में डोनेट करते आए । बदले में 9700 रुपए प्रति माह का स्टाइपेंड और पत्नी की तनख्वाह से जीवन चलता रहा।  20 साल लगातार मुख्यमंत्री रहे इस शख्स ने कभी भी इंकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया । कभी इतनी आय ही नहीं हुई कि रिटर्न फाइल करने की नौबत आए।  संपत्ति के उत्तराधिकार के तौर पर सिर्फ एक 432 स्क्वायर फीट का टिन शेड मिला, वो भी मां की ओर से । पिता अमूल्य सरकार पेशे से दर्जी थे । मां अंजली सरकार सरकारी कर्मचारी थीं। ये 432 स्क्वायर फीट का टीन शेड उसी मां की कमाई का उपहार रहा अपने कामरेड बेटे की खातिर। माणिक सरकार ने त्रिपुरा के धानपुर से चुनाव लड़ते हुए इस बार जो एफिडेविट फाइल किया, उसे पढ़ते हुए राजनीति के अक्षर लड़खड़ाने लगते हैं । हाथों में नकदी सिर्फ 1520 रुपए। बैंक के खाते में केवल 2410 रुपए। कोई इंवेस्टमेंट नहीं। मोबाइल फोन तक नहीं। न कोई ई-मेल एकाउंट न ही कोई सोशल मीडिया एकाउंट।
चुनाव में हार जीत लगी रहती है। इस देश में मधु कोड़ा मुख्यमंत्री बनते हैं और माणिक सरकार चुनाव हारते हैं। फिर भी यही क्या कम है कि आज के दौर में भी माणिक सरकार होते हैं। उनका होना ही हमारे समय में उम्मीदों के जिंदा होने की निशानी है…..

(मदन मोहन बिजलवान की फेसबुक पोस्ट)