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कामयाबी: कार लूट कर भागने वाले यूपी के दो शातिर बदमाश गिरफ्तार, मास्टर माइंड फरार

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संवाददाता
रुद्रपुर, 24 जून। जिला पुलिस ने कार लूटने वाले एक शातिर गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। उनका तीसरा साथी एवं गिरोह का मास्टर माइंड फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस के मुताबिक, गिरोह गत 21 जून को पंतनगर थाना क्षेत्र में नगला के पास बरेली के एमपी सिंह को पेड़ से बांधकर कार व नकदी लूट कर फरार हो गया था। बदमाशों की गिरफ्तारी के पीछे किच्छा थाने के दो सिपाहियों की उल्लेखनीय भूमिका रही है। पुलिस ने दो आरोपियों को लूटी गई कार, तमंचों और घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस का कहना है कि पकड़े गए बदमाशों की पहले हल्द्वानी में चालक की हत्या करके कार लूटने की योजना थी। इसके लिए उन्होंने एक ट्रैवल एजेंसी से कार किराए पर बुक करने की कोशिश की थी।

एसएसपी दिलीप सिंह कुंवर ने मीडिया के सामने घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 21 जून को बरेली के राजेंद्र नगर निवासी एमपी सिंह की कार संख्या यूपी 25 सीक्यू 7353 को तीन बदमाशों ने तमंचे के बल पर लूट लिया था। बदमाश एमपी सिंह को पेड़ से बांधकर चले गए थे। किच्छा के दो सिपाहियों कुलदीप और गिरीश बिष्ट ने उसी दिन उक्त कार चेकिंग के लिए रोकी थी और कार सवारों के फोटो व एक की आईडी ले ली थी। जब मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई तो सिपाहियों ने फोटो और आईडी से बदमाशों की तस्दीक की। इस दौरान पुलिस व एसओजी की टीम ने बड़ी तादाद में क्षेत्र के सीसीटीवी खंगाले।
पुलिस की भागदौड़ कामयाब रही। उसने अबरार खां उर्फ हैदर, निवासी- फरीदपुर, बरेली व अमजद, निवासी- शेरगढ़, बरेली (यूपी) को धर दबोचा। पुलिस ने उनसे लूटी गई कार व लूट में प्रयुक्त मोटरसाइकिल संख्या यूपी 25 सीएस 7893 भी बरामद की। तलाशी में दोनों से तमंचे व कारतूस भीबरामद हुए हैं। इस घटना का मास्टर माइंड अनिल कुमार राठौर, निवासी- सरकस, बहेड़ी फरार बताया गया है।

एसएसपी दिलीप सिंह कुंवर के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों अपराधी अलग अलग मामलों में बरेली जेल में बंद थे। जेल में ही तीनों की जान पहचान हुई तो सबने कार चालक की हत्या करके कार लूटने की योजना बनाई। जेल से छूटने के बाद तीनों हल्द्वानी पहुंचे। वहां कार बुक करके ले जाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बगैर आईडी के कार नहीं दी गई।  लौटते समय उन्हें रास्ते में एमपी सिंह की कार मिली, जो सड़क पर खड़ी थी। एमपी सिंह की किस्मत अच्छी थी कि बदमाशों को उसकी हत्या करने का मौका नहीं मिल सका। तब उन्होंने उसे तमंचे के बल पर एक पेड़ से बांध दिया और उसकी कार लेकर चंपत हो गए। किस्मत बदमाशों की  अच्छी नहीं थी कि उनका पाला उत्तराखंड पुलिस से पड़ गया और वे सलाखों के पीछे पहुंच गए।