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जनमत: ‘सिद्धबली जनशताब्दी ट्रेन’ कहीं कोटद्वार निवासियों के लिए मात्र छलावा तो नहीं ?’

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साभार: अनुसूया रावत


कोटद्वार, 01 मार्च।

गढ़वाल के निवासियों को यह समझने की आवश्यकता है कि क्या यहां से शुरू होने जा रही नई रेल सेवा ‘ ‘सिद्धबली जनशताब्दी ट्रेन’ वास्तव में एक छलावा तो नहीं बनने जा रही है ?

क्योंकि:-

1.दो रेल सेवाओं को बंद कर, अब नाम बदलकर तीसरी ट्रेन को चलाया जा रहा है।

2.पहले, रात्रि में चलने वाली मसूरी एक्सप्रेस में अधिकांशतः नौकरीपेशा वाले लोग ही सफर करते थे, जिसमें सबसे ज्यादा प्राइवेट जॉब करने वाले लोगों को फायदा होता था और उनकी छुट्टी बच जाती थी। नई ट्रेन का टाइमिंग ही ऐसा है कि नौकरीपेशा वाला आदमी पूरी छुट्टी खर्च करके ही दिल्ली से आ- जा सकेगा।

3. गांव से आने वाला व्यक्ति, जिसे इस ट्रेन से  वाया कोटद्वार दिल्ली जाना है उसे रात होटल में काटनी पड़ेगी।
वह व्यक्ति जिसे इस ट्रेन से दिल्ली से कोटद्वार होते हुए गांव जाना है उसे भी कोटद्वार पहुंचकर रात अवश्य ही होटल में बितानी पड़ेगी।

4. रेलवे  विभाग ने पहले लखनऊ का कोच  बंद किया,  फिर मसूरी एक्सप्रेस व गढ़वाल एक्सप्रेस बंद की।

5. यह सब प्रपंच केवल क्रेडिट लेने की  व किराया बढ़ाने की रणनीति प्रतीत होती  है।

कोटद्वारवासी इससे स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। देर-सवेर सबकी समझ में आ ही जाएगा। सरकार के इस निर्णय का सभी को पूर्ण जोर-शोर से विरोध करना चाहिए व ‘हमें अपनी  दोनों पुरानी ट्रेन वापस चाहिए ‘ की भी मांग करनी चाहिए ।

यह सब कोटद्वार ही नहीं अन्य शहरों के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।

कृपया सतर्क रहें व अपने अधिकारों के लिए सजग रहें। क्योंकि चुनाव के समय यह  हमारे दरवाजों पर ही आकर खड़े होंगे।
……………..
दूसरी तरफ, इस मुद्दे को लेकर व्यापार मंडल ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन की तरफ से सोशल मीडिया पर व्यक्त प्रतिक्रिया मूल रूप में यहां प्रस्तुत की जा रही है-
….. ‘कोटद्वार गढ़वाल के लोगों को सरासर बेवक़ूफ़ बनाया जा रहा है। एक ट्रेन को बन्द कर नाम बदल कर दुसरी ट्रेन को चलाना। जबकि कोटद्वार के लिए ये ट्रेन नये समय के अनुसार चलानी चाहिये थी। वाह रे,  क्या नाटक हैं? कोटद्वार वाले इसी के लायक हैं।पहले लखनऊ का कोच  बंद किया फिर मसूरी एक्सप्रेस, बंद गढ़वाल एक्स बंद। अब सरासर बेवकूफ बनाया जा रहा है और कोटद्वार के लोग ताली बजा रहे हैं। शुक्रिया अदा कर रहे हैं। यहाँ के जनप्रतिनिधि कहाँ हैं, ये पता ही नहीं। जब जनता चुप रहना और जुल्म सहना सीख जाती है तो राजा निरंकुश हो जाता है।
कोटद्वार व्यापार मंडल इस का पुरजोर विरोध करेगा। इस ट्रेन को नहीं चलने दिया जाएगा। हमको हमारी पुरानी ट्रेन ही वापस चाहिए।’