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सियासत: ‘हरेला’ के बहाने ‘हरदा’ का हमला, बीजेपी पर उनकी योजनाएं रोक देने का आरोप

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संवाददाता
नैनीताल, 21 जून। उत्तराखंड के लोकपर्व   हरेला पर्व को व्यापक पहचान दिलाने के साथ ही उसे राज्य पर्व घोषित करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एक बार फिर इस पर्व को चर्चाओं के केंद्र में ले आए हैं। अगले महीने आ रहे हरेला पर्व से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने उसकी चर्चा छेड़ते हुए सूबे की सियासत में एक नयी बहस शुरू कर दी है। हरदा ने हरेले के बहाने भाजपा सरकार पर बड़ा सियासी हमला बोलते हुए अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में शुरू की गई जनोन्मुखी एवं कल्याणकारी योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल देने पर असंतोष भी जाहिर किया है।  सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट में उन्होंने लिखा है-  ‘मैंने हरेले को राज्य पर्व घोषित किया। साथ ही ‘मेरा वृक्ष- मेरा धन’ योजना शुरू की। सरकार से हटते ही इस योजना को भी अलविदा कह दिया गया।
रावत ने लिखा है-  ‘हरेला उत्तराखंड का मुख्य पर्व है। इसके लिए मेरी सरकार के समय मैंने ‘मेरा वृक्ष- मेरा धन’ योजना शुरू की। शुरू में इस योजना के तहत वन विभाग और उद्यान विभाग दोनों ने मिलकर लोगों को पौध उपलब्ध कराए। मेरा मकसद फलदार और छायादार पौधों का ज्यादा रोपण कराने का था। इनमें फलदार नींबू, माल्टा, कीवी पौध और चारा प्रजाति के गेठी, भीमल, खड़ीक और बहुवा जैसे पौध उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा हरिद्वार में हाथी बाहुल्य क्षेत्र में कड़ी पत्ता के पौधों को प्राथमिकता दी गई।
इन पौधों को रोपण करने और तीन साल तक इनकी रखवाली करने की व्यवस्था की गई। पौध लगाने वाले और इनकी रखवाली करने वालों के लिए बोनस के रूप में एफडी की व्यवस्था की गई। तय किया गया था कि चारा प्रजाति के जो जितने पौध लगाएगा उसे 300 रुपए और फलदार वृक्ष लगाने वाले को 400 रुपये प्रति पौध के हिसाब से बोनस दिया जाएगा। यह योजना लोकप्रिय हुई। लोगों ने हाथों हाथ इस योजना को लिया। उन्हें तीन साल बाद एक निश्चित रकम भी मिल रही थी।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लिखा है-  ‘मगर नियति को कुछ और मंजूर था। मेरी सरकार जाने के बाद इस योजना को भी अलविदा कह दिया गया। ‘मेरा वृक्ष- मेरा धन’ योजना कभी थी। अब वह कहानी बनकर लोगों को सुनाई जाएगी। मेरी यह वृक्षारोपण को बढ़ावा देने की नीति थी।’