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स्मरण: पढ़िए, चिपको आंदोलन की जननी गौरादेवी राणा को अर्पित चंदन सिंह नेगी की कविता

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चि पको दिवस पर चिपको आंदोलन की जननी एवं सच्ची पर्यावरण योद्धा गौरादेवी राणा को श्रद्धांजलिस्वरूप अर्पित पर्यावरण बचाओ अभियान के प्रणेता कवि एवं पत्रकार चंदन सिंह नेगी की एक कविता यहां प्रस्तुत की जा रही है-
                 गौरा देवी
उस दिन
पुरुषों के हाथों में
कुल्हाड़े़ थे 
जंगल काटने के लिए
 स्त्रियों के हाथों में दरांतियां थीं
जंगल बचाने के लिए
कुल्हाड़ों का नेतृत्व 
कुछ पुरुष कर रहे थे 
जिनका नाम- पता नहीं था
 दरांतियों का नेतृत्व 
एक स्त्री कर रही थी 
जिसका नाम गौरा देवी था
 उस दिन कुल्हाड़े मौन थे 
आज गौरा देवी नहीं है 
दरांतियां  मौन हैं।
  -चन्दन सिंह नेगी