Home संस्कृति उत्सव:  प्रकृति के प्रेम, श्रृंगार, सौंदर्य और नवसृजन का पर्व है बसन्त...

उत्सव:  प्रकृति के प्रेम, श्रृंगार, सौंदर्य और नवसृजन का पर्व है बसन्त पंचमी 

87
0

 

देहरादून- आज बसंत पंचमी का त्यौहार है, जिसका सीधा संबंध ऋतुराज बसंत से है। वसंत को ऋतुओं यानी मौसमों का राजा कहा जाता है। इसे प्यार का मौसम भी कहते हैं, क्योंकि धरती इस मौसम में खूबसूरत फूलों का  श्रृंगार करती है। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में कई उत्सव मनाने का भी रिवाज है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा की जाती है और बच्चों की पढ़ाई का आरंभ भी किया जाता है। आन्ध्र प्रदेश में इसे विद्यारंभ पर्व कहते हैं। यहां के बासर सरस्वती मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
बसंत पंचमी पर विद्या और बुद्धि की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। पुराणों में वर्णित एक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी आराधना की जाएगी।
पारंपरिक रूप से देश के कई हिस्सों में इस दिन बच्‍चे को प्रथमाक्षर यानी पहला शब्‍द लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है।
आज ही के दिन होलिका दहन के लिए पूजा करके बांस भी गाड़ा जाता है और परम्प‌रानुसार इसी स्थान पर होली को सजाया जाता है और होली के दिन यहीं पर इसको दहन भी किया जाता है।