Home Home ऐसिड अटैक की पीड़िताओं को मुफ्त क़ानूनी मदद का प्रावधान

ऐसिड अटैक की पीड़िताओं को मुफ्त क़ानूनी मदद का प्रावधान

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चमोली- महिलाओं के लिए अभिशाप बन चुका ‘एसिड अटैक’ विषय पर विधिक जानकारी देने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रवि प्रकाश शुक्ला (सिविल जज, सीनियर डिवीजन) की अध्यक्षता में गुरुवार को गोपेश्वर जिला कोर्ट सभागार में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। जिसमें जिले के समस्त विभागों के अधिकारियों को एसिड अटैक एवं महिलाओं पर हो रहे अपराधों को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया गया।  
सिविल जज (सी.डि.)/जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने एसिड अटैक विषय पर विधिक जानकारी देते हुए कहा कि एसिड हमले से हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इस घटना से महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। आपसी प्रेम संबंधों में किसी भी वजह से दरार पड़ जाने के कारण अक्सर महिलाएं एसिड हमले की शिकार हो रही हैैं। उन्होंने कहा कि धारा 326क और 326ख में भारतीय दंड संहिता के तहत दोषियों को दंडित करने का प्रावधान है। एसिड हमले की पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास के लिए प्रतिकर के स्वरूप न्यूनतम 3 लाख रुपए तक सरकार की ओर से मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि एसिड बिक्री पर प्रत्यक्ष रूप से कोर्ट ने प्रतिबंध भी लगा रखा है।
उन्होंने कहा कि समाज में कुछ व्यक्ति मानसिक विकृति के होते हैं। जिनकी इच्छा पूर्ति न होने पर एसिड अटैक जैसी घटनाएं हो रही हैं। ऐसे लोगों को भारतीय दंड संहिता में दस वर्ष तक की सजा अथवा आजीवन कारावास व जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि एसिड अटैक से पीड़ित लोग प्राधिकरण में आवेदन कर अपने मुकदमे की पैरवी के लिए निशुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पैरा लीगल वॉलियंटर (पीएलवी) की जिम्मेदारी है कि वह एसिड अटैक से जुड़े मामले सामने आने पर तुरंत प्राधिकरण को सूचित करें। 
उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर है। प्रत्येक वर्ग के लोगों तक समान न्याय व्यवस्था के लिए विधिक सेवा शुरू की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर एवं गरीब वर्ग के लोग कानूनी लड़ाई में इसका लाभ ले सकते हैं।