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कांग्रेस: पार्टी संगठन की सुस्ती पर भारी पड़ रही है जनप्रिय नेता हरीश रावत की सियासी सक्रियता

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कैलाश जोशी ‘अकेला’
 
    देहरादून–  प्रदेश में प्रचंड बहुमत की सरकार के साथ – सा भारत की केन्द्र सरकार भी प्रचंड बहुमत के अधीन चल रही है। वहीं उत्तराखण्ड में प्रचंड बहुमत के बीच जहां कांग्रेस पार्टी संगठन की हीलाहवाली के चलते हाशिए पर पहुंच चुकी है, वहीं बात करें उत्तराखण्ड के दिग्गज नेता हरीश रावत की तो 70 से ऊपर की उम्र में भी वह पूरे दमखम के साथ अपने राजनीतिक विरोधियों पर हर तरह से भारी पड़ रहे हैं। वर्तमान स्थिति को अगर देखा जाए तो संगठन से कहीं ऊपर हरीश रावत का जलवा जनता के बीच सर चढ़कर बोल रहा है। इस वक्त हरीश रावत असम की कमान संभाले हुए हैं।

 उत्तराखण्ड में इस वक्त मकर संक्रांति व हिन्दू नववर्ष का पर्व बड़े धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है, जिसमें कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत इस वक्त बढ़चढ़ कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैैं। हरीश रावत इस समय पंद्रह दिन के प्रवास पर उत्तराखण्ड के पहाड़ी अंचल में मकर संक्रांति का पर्व जनता के बीच मना रहे हैं। देखा जाए तो हरीश रावत का लोहा उत्तराखण्ड में ही नहीं बाहरी राज्यों में भी माना जाता है। आज भी राजनीतिक गलियारों से लेकर नुक्कड़ों व चाय की दुकानों में राजनीतिक चर्चाएं जब जब चलती हैं तो कांग्रेस का जिक्र होते ही लोग यही बात करते नजर आते हैं कि सन् 2022 में हरीश रावत ही कांग्रेस को सत्ता शीर्ष तक पहुंचाने में कामयाबी हासिल कर सकते हैं।

राजनीतिक गलियारों में तो चर्चाएं आम हैं कि नेता प्रतिपक्ष डाॅ. इंदिरा हृदयेश और वर्तमान पार्टी प्रदेश प्रीतम सिंह की सुस्त गतिविधियों के चलते उत्तराखण्ड में कांग्रेस हाशिए की कगार पर पहुंच गयी है। कांग्रेस के ये दोनों नेता अब तक प्रदेश सरकार को सदन से सड़क तक घेरने में नाकाम साबित हुए हैं। आज भी कांग्रेस में मास लीडर की कमी खल रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि प्रीतम सिंह एक अच्छे विधायक और मंत्री होने के गुण रखते हैं। साथ प्रदेश की नेता प्रतिपक्ष भी एक मंझी हुई विधायक व मंत्री हो सकती हैं किन्तु संगठनात्मक दृष्टि से हरीश रावत ही प्रदेश की कमान संभालकर भाजपा को आगामी चुनाव में पूरी तरह पटखनी दे सकते हैं। जिस तरह से राज्य गठन के बाद कांग्रेस को हाशिए से निकालकर उत्तराखण्ड के प्रथम विधानसभा चुनाव में हरीश रावत ने अपने नेतृत्व में पूर्ण बहुत के साथ  कांग्रेस की पहली निवार्चित सरकार बनवाई थी। स्थिति अब भी उसी प्रकार से सामने है और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चाहे विपक्ष कुछ भी कहता रहे, हरीश रावत का प्रभाव जनता के बीच आज भी वैसे ही बरकरार है, जैसा कि राज्य गठन के समय था।
हाल ही में एक निजी चैनल में भी उत्तराखण्ड के राजनीतिकि सर्वे में प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को पछ़ाड कर हरीश रावत 39 प्रतिशत की बढ़त से जनता के चहेते जमीनी नेताओं में शुमार माने गए। किन्तु कांग्रेस संगठन में राजनीतिक वर्चस्व की जंग अब भी जारी है। नेता प्रतिपक्ष डाॅ. इंदिरा हृदेयश और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कद भाजपा सरकार को घेरने में बौना साबित होता नजर आ रहा है।
सूत्रों की मानें तो कमजोर संगठन के चलते कांग्रेस संगठन के लिए 2022 भी कहीं चुनौती न साबित हो, जबकि इसके उलट हरीश रावत लगातार जनता के बीच अपनी पकड़ को मजबूत बनाए हुए हैं। जिस प्रकार सरकार की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस संगठन द्वारा आरोप प्रत्यारोप लगाए जाते हैं। उनको  कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने का कार्य संगठन के माध्यम से होता है। किन्तु उस चुनौतीपूर्ण कार्य को हरीश रावत  जनता के बीच जाकर एक कांग्रेस कार्यकर्ता की हैसियत से बखूबी निभा रहे हैं।

अब देखने वाली बात यह होगी कि नई कार्यकारणी व कांग्रेस संगठन 2022 को लेकर किस तरह सियासी रणनीति बनाती है।