Home देश अफसोसजनक: एक अफवाह ने बवाल मचा दिया दिल्ली की कोर्ट परिसर में

अफसोसजनक: एक अफवाह ने बवाल मचा दिया दिल्ली की कोर्ट परिसर में

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नई दिल्ली-  शनिवार को  यहां की तीस हजारी कोर्ट में सिर्फ एक अफवाह की वजह से पुलिस और वकीलों के बीच महाभारत छिड़ गया।  अफवाह यह थी कि पुलिस वालों की गोली से एक वकील की मौत हो गई। बस फिर क्या था, अफवाह से तमतमाए वकीलों ने  आव देखा न ताव पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया। इस हमले में 28 पुलिसवाले और वकील घायल हुए।

कोर्ट में मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि लॉकअप के बाहर हुए मामूली झगड़े के बाद पुलिसकर्मियों ने वकीलों को समझाने का प्रयास किया तो वे गाली-गलौज पर उतर आए। हंगामे के बीच उन्होंने पुलिसकर्मियों से हाथापाई शुरू कर दी।  इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने हवा में गोली चला दी जो वकील विजय वर्मा के सीने में लगी। इसके बाद वकीलों की भारी भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने कोर्ट परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों को पीटना शुरू कर दिया और पुलिस की आठ बसों में तोड़फोड़ कर दी। इसके साथ ही एक जिप्सी व 13 बाइकों सहित 17 वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

उल्लेखनीय है कि जब विवाद थमा तो दोनों पक्षों में मीटिंग हुई। इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच की एसआईटी को सौंपी गई है। घटना की सूचना मिलने पर स्पेशल सीपी, जॉइंट सीपी, डीसीपी और अन्य पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे । सूत्रों का कहना है कि गोली लगने से वकील की मौत की अफवाह कोर्ट परिसर में तेजी से फैली और गुस्साए वकीलों ने हंगामा शुरू कर दिया। उन पर आरोप है कि उन्होंने कई गाड़ियों में आग लगाने के साथ ही पुलिस अफसरों की भी पिटाई कर दी और एक अफसर को बंधक भी बनाया। कोर्ट में एक केस की तारीख पर आए पुलिस इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर भी इस भीड़ की चपेट में आ गए। वकीलों ने कोर्ट परिसर में जो भी पुलिसवाला दिखा उन्हें पीटा जिसमें एसएचओ से भी हाथापाई हुई।वकील लगातार पुलिस कमिश्नर को बुलाने की जिद पर अड़े और आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग कर रहे थे। इस हंगामे में कई पुलिसकर्मियों और वकीलों के कपड़े और वर्दी फटी और करीब 15 गाड़ियों को नुकसान पहुंचा, एक पीसीआर वैन भी आग के हवाले कर दी गई। जेल वैन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हिंसा का विडियो और फोटो बना रहे दर्जनों लोगों के मोबाइल छीनकर तोड़ दिए गए।वकीलों और पुलिस के बीच शनिवार को जो कुछ हुआ, उससे वकीलों में रोष है, उन्होंने घटना की निंदा की है। बार संगठन, कोऑर्डिनेशन कमिटी के चेयरमैन महावीर शर्मा ने कहा गलती दोनों तरफ की रही होगी। वकीलों ने भी बेवजह अकड़ दिखाई होगी और पुलिसवालों ने भी, लेकिन मामले को बातचीत या शांतिपूर्ण तरीकों से भी सुलझाया जा सकता था। गोली चलाने की क्या जरूरत थी ? वह भी न हवा में… न पैरों पर.. सीधे वकील की छाती पर बंदूक तान दी। पुलिस की इस हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।