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अपराध: मेरठ के शातिर ठग गैंग का एक सदस्य गिरफ्तार, एक फरार

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देहरादून।  दून शहर अब बाहरी राज्यों के अपराधियों के लिए बहुत आसान टारगेट बनता जा रहा है। खासतौर से लोगों के साथ  ठगी करने वाले कयी शातिर  गिरोह आए दिन यहां उम्रदराज लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। थाना बसंत विहार में बुजुर्ग दंपति के साथ ठगी करने  वाले एक ऐसे ही शातिर अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है ।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता वृद्ध महिला माया सिंह पत्नी स्व. हरस्वरुप, निवासी-849, इन्द्रानगर, थाना- बसंत विहार द्वारा चौकी इन्द्रानगर पर लिखित तहरीर दी गयी थी कि 3 नवंबर को सुविधा मार्केट के पास दो युवकों ने, जो सफेद स्कूटी पर थे तथा उक्त स्कूटी पर यूपी 15 नं की प्लेट लगी थी,  उसे अपनी बातों में उलझा कर विश्वास में लेते हुये  एक बन्द दुकान के पास ले गए तथा उसके हाथों की दो सोने की चूड़ियां, उनका साईज बड़ा करने की बात कहते हुये ले लिए और मौके से फरार हो गये।इसी प्रकार 11 नवंबर को जेपी जैन निवासी-309 चमनविहार, निरंजनपुर, थाना पटेलनगर ने चौकी इन्द्रानगर पर शिकायत दर्ज करायी कि जीएमएस रोड पर दो लड़कों द्वारा उनकी स्कूटी का पीछा कर उन्हें आवाज लगाते हुये रोक लिया तथा उनसे अपनी जान पहचान निकालते हुये कहा कि ‘मैं आपके आशीर्वाद से धनवान व्यक्ति बन गया हूं’ और अपनी दुकान के मुहुर्त में आंमत्रित करते हुए  गिफ्ट के रूप में मोबाईल देने की बात कही और उनसे हाथ मिलाया।इस दौरान उनके हाथ में पहनी सोने की अँगूठी को देखते हुये उन्होंने कहा कि वे उसे बड़ी बनाकर देंगे। फिर उन्होंने साथ-साथ आने को कहा तो वे उनके पीछे-पीछे जाने लगे, लेकिन तभी वे अपनी स्कूटी भगाकर फरार हो गये। शिकायतकर्ता की तहरीर के आधार पर थाना बसंत विहार पर अभियोग पंजीकृत किया गया।
बुजुर्ग नागरिकों के साथ हुई उपरोक्त दोनों घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक नगर व क्षेत्राधिकारी नगर के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष बसन्त विहार द्वारा थाना स्तर पर एक टीम गठित की गयी। टीम द्वारा घटनास्थल के आस-पास उपस्थित लोगों से पूछताछ करते हुये अज्ञात अभियुक्तों का हुलिया प्राप्त किया गया व देहरादून में पूर्व में घटित हुयी ठगी की घटनाओं में गिरफ्तार अभियुक्तों के सत्यापन की कार्यवाही करते हुए घटना के दिन व उससे पूर्व होटलों में ठहरे संदिग्ध लोगों की फोटो आईडी की जानकारी ली। 
अथक प्रयासों के फलस्वरुप पुलिस को जानकारी प्राप्त हुयी कि उक्त घटनाओं को अंजाम देने वाले अभियुक्तगण शातिर किस्म के ठग हैं, जो मेरठ के थाना इंचोली क्षेत्र के रहने वाले हैं।वह प्रत्येक शनिवार को अपनी स्कूटी JUPITER संख्या- UP15CU-0768 से देहरादून आते हैं। पूर्व में भी विभिन्न तिथियों पर कोतवाली क्षेत्र के होटल शिवा पैलेस में करीब 7-8 बार आकर रुके थे, जहां पर इनके द्वारा अपनी फोटो व आईडी देते हुये कमरा किराये पर लिया गया। होटल छोड़ने के बाद दोपहर के समय घटना कर सांय के समय वह अपने कपड़े बदलकर सीधे मेरठ चले जाते थे। थानाध्यक्ष बसन्त विहार के निर्देशन में एक पुलिस टीम को जनपद मेरठ रवाना किया गया, जिसके द्वारा अभियुक्तगणों का पीछा करते हुये सटीक सूचना के आधार पर मेरठ क्षेत्र से मुख्य अभियुक्त मो. वसीम पुत्र ईस्माइल निवासी- घासमण्डी कस्बा-लाबडा, थाना-इंचोली, मेरठ, उप्र को स्कूटी JUPITER संख्या- UP15CU-0768 के साथ गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से पूर्व की घटनाओं में धोखाधड़ी से प्राप्त किये गये सोने के कंगन व अगूंठी बरामद की गई। पूछताछ में उसके द्वारा बताए गए सहअभियुक्त मो. अमान पुत्र सलाउद्दीन निवासी-ग्राम- चोपला, कस्बा-लाबडा, थाना-इंचोली, मेरठ उप्र के घर पर दबिश दी गई तो वह घर से फरार  पाया गया, जिसकी गिरफ्तारी हेतु एक टीम पुन: रवाना की गयी है जबकि गिरफ्तार अभियुक्त को न्यायालय में पेश कर विधिक कार्यवाही अमल में लायी जायेगी।पूछताछ में अभियुक्त वसीम ने बताया कि वह पांचवी तक ही पढ़ा लिखा है। पढाई छूटने के बाद वह फेरी लगाने का काम करने के लिये दिल्ली चला गया था। दिल्ली में बुजुर्ग नागरिकों के साथ हो रही ठगी की घटना व अखबारों से अभियुक्तों द्वारा अपराध करने के तरीके की जानकारी हो जाने पर उसने भी ऐसे अपराध कर जल्द पैसा कमाने की ठानी। वापस मेरठ लौटकर उसने अपने पड़ोसी मो. अमान पुत्र सलाउद्दीन को ठगी करने के काम में अपने साथ शामिल होने को कहा तो उसनेे बताया कि उसकी रिश्तेदारी देहरादून में है, जहां पर काफी रिटायर्ड व बुजुर्ग लोग रहते हैं, जिन्हें आसानी से ठगी का शिकार बनाया जा सकता है। उसके बाद से प्रत्येक शनिवार को वसीम व अमान सफेद रंग की JUPITER SCOOTY UP15-CU 0768  से देहरादून आकर होटल शिवा पैलेस में रुकते थे। अगले दिन दोपहर तक बुजुर्गों की तलाश में घूमते थे। जैसे ही उन्हें कोई बुजुर्ग अकेले में सोने की अंगूठी व कंगन पहने दिखते थे, उनके पास जाकर पांव छूते थे और उनसे पुरानी जान-पहचान निकाल कर अपनी बातों में उलझा लेते थे तथा उनके द्वारा पहनी गयी अंगूठी अथवा कंगन को बड़ा करने की बातें कहकर उनसे  अंगूठी अथवा कंगन को  लेकर मौके से फरार हो जाते थे। मेरठ पहुंचकर बुजुर्ग व्यक्तियों से ठगी कर प्राप्त की गई ज्वेलरी को आपस में बांट लेते थे।