Home उत्तराखंड संस्थान: वनस्पतियों की खोज व संवर्द्धन में जुटा है वन अनुसंधान केंद्र

संस्थान: वनस्पतियों की खोज व संवर्द्धन में जुटा है वन अनुसंधान केंद्र

53
0


उमेश सिंह राणा

लालकुआं । यूं तो उत्तराखंड अनेकों प्रकार की जैविक विविधता लिए हुए एवं कई प्रकार की जड़ी बूटियों औषधि पादप एवं जड़ी बूटियों का उत्पादन करने वाला प्रदेश है, किंतु फिर भी वन विभाग द्वारा कई प्रजातियों के पौधों के वर्धन के लिए एवं उनकी गुणवत्ता एवं उत्पाद बढ़ाने के लिए नित नए अनुसंधान किए जाते हैं । ये तमाम  अनुसंधान कार्य बरेली- नैनीताल मुख्य मार्ग के किनारे स्थित वन अनुसंधान केंद्र लालकुआं में होते हैं।

लाल कुआं तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अंतर्गत टांडा रेंज के कक्ष संख्या 20 में स्थित वन अनुसंधान केंद्र पूर्व में मुंशी पौधशाला के नाम से जाना जाता था। जानकारी के अनुसार इसकी स्थापना 1958 की गई थी पूर्व में यहां मात्र पापुलर एवं यू के लिप्टिस पर अनुसंधान का कार्य होता था । वर्तमान में यहाँ विभिन्न प्रकार के औषधीय एवं अन्य उपयोगी पौधों पर अनुसंधान किया जाता है ।यहां कई शोधार्थी ,वनस्पति शास्त्री एवं वानिकी से संबंधित आईएफएस, पीएफएस तथा अन्य कृषि प्रशिक्षार्थी वनस्पति शास्त्र से संबंधित जानकारी के लिए यहां आया करते हैं ।यहां के इंचार्ज वन क्षेत्राधिकारी एनएस रौतेला ने बताया कि वर्तमान में इस अनुसंधान केंद्र में फाइकस डेमोप्लाट ,चंदन प्रयोग , दशमूल डेमोप्लाट , रंग व टेनिन प्रयोग ,गम प्रयोग ,जैवविविधता प्रयोग ,पापुलेटम प्रयोग एवं यूके सीएसओ जैसे महत्वपूर्ण प्रयोग किए जा रहे हैं जिनके परिणाम आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक देखने को मिल रहे हैं।उन्होंने कई पौधों की विशेषताओं के बारे में बताया कि थनेला का पौधा दुधारू पशुओं में दुग्ध की बढ़ोतरी करता है वही पनियाला नाम के पौधे में शेर प्रजाति के जानवर अपने पंजे रगड़ कर उनको पैना एवं नुकीला करते हैं उन्होंने बताया कि यह उत्तराखंड का एकमात्र अनुसंधान केंद्र है जो हल्द्वानी डिवीजन के अंतर्गत आता है।