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सलाह : दीपावली पर बच्चों के पटाखे जलाते वक्त सावधानी बरतें

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                            बच्चों के लिए दिवाली का मतलब होता है पटाखे जलाना। यूं तो पटाखे आपकी और पर्यावरण की हेल्थ के लिए अच्छे नहीं माने जाते और इसलिए अब बहुत बड़ी संख्या में लोग पटाखे नहीं जलाते। पटाखों के जलने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर ऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं, जो कई गंभीर रोगों की वजह बनती हैं। इतना ही नहीं, अगर पटाखे जलाते समय सावधानी न बरती जाए तो इससे गंभीर चोट लगने की संभावना रहती है। इसलिए अगर आपने इस बार दिवाली पर बच्चों के साथ पटाखे जलाने का निर्णय लिया है तो यह बेहद जरूरी है कि आप सुरक्षा के मानकों का भी पूरा ध्यान रखें। आपको दिवाली पर बच्चों के साथ पटाखे जलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।अक्सर देखने में आता है कि कुछ बच्चे पटाखों को हाथ में लेकर ही जला देते हैं और उसे जलाने के बाद दूर फेंक देते हैं। इससे उनके व दूसरों के चोटिल होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। कई बार पटाखा हाथ में ही फट जाता है तो कभी जब बच्चे उसे फेंकते हैं तो वह दूसरों को भी चोटिल कर सकता है। इसलिए पटाखों को हमेशा जमीन पर रखकर ही जलाएं।जब भी बच्चे पटाखे जलाएं, उनके साथ एक बड़े व्यक्ति का होना बेहद जरूरी है। कभी भी बच्चों को खुद से पटाखे जलाने की अनुमति न दें। अधिकतर मामलों में दुर्घटना का मुख्य कारण पैरेंट्स का लापरवाह रवैया ही होता है।कई बार ऐसा होता है कि लोग छोटी जगह पर ही पटाखे जलाने लग जाते हैं, इससे दुर्घटना होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। मसलन, अगर किसी के घर की गली छोटी है, तो वहां पर पटाखे न जलाएं। इससे पटाखा किसी के घर, बिजली के खंभे या तार पर लग सकता है और बड़ी हानि हो सकती है। बेहतर होगा कि आप किसी खुले मैदान या पार्क में पटाखे जलाएं।पटाखे जलाते समय बच्चे अक्सर अपने हाथ में माचिस या जलती हुई मोमबत्ती रखते हैं, लेकिन आप उन्हें यह सब न दें। कई बार अनजाने में बच्चे मोमबत्ती को पटाखे रखी हुई जगह पर ले जाते हैं और फिर उससे एक बड़ा धमाका हो सकता है। कुछ बच्चे खुद से पटाखे निकालने के चक्कर में भी पटाखे रखने वाली जगह पर चले जाते हैं। यह वास्तव में काफी गंभीर हो सकता है।जब आप पटाखें जला लें तो उसका डिस्पोजल भी सही तरह से करें। खासतौर से, फुलझड़ी आदि जलाने के बाद बच्चों के हाथों से ले लें और उसे इधर−उधर फेंकने की बजाय पानी की बाल्टी या मिट्टी में डालें। दरअसल, फुलझड़ी जलने के बाद भी गर्म होती है और अगर उसे सही तरह से डिस्पोजल न किया जाए तो इससे चोट लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है।