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जन्मदिन आज : 70 के दशक में पहाड़ की पगडंडी से स्कूल गईं माँ मंगला जी…

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राजेश पयाल की पोस्ट से

माता मंगलाजी, जो आज गरीब और जरूरतमंद लोगों की निस्वार्थ भाव से सेवा और सहायता कर रही हैं,उत्तराखण्ड क्या, देश की प्रसिद्ध महिलाओं में हैं, वह कभी मंगला सजवाण थीं। भागीरथीपुरम और नई टिहरी के बीच में एक गांव पड़ता है पांगर। वहाँ माता मंगला जी ने 16 अक्टूबर 1965 को श्री मातबर सिंह सजवाण, श्रीमती कमला देवी के घर में जन्म लिया।

मंगला सजवाण की शिक्षा पुरानी टिहरी में हुई। वह गांव से भेंतोगीगाड़ उतरती थीं, फिर आगे – आज का भागरथीपुरम- तातणि देवी ( जो आज बांध स्पिलवे है ) से पुराना मोटर अड्डा उतरती थीं। तातणि देवी यानी लोग तातणि फेंकते थे। इसलिए नाम पड़ा। आज वहाँ से बांध को देखने के लिए जाली लगाई गई है। पुराना मोटर अड्डा उतरने के बाद, वहां से प्रताप हाई स्कूल जाती थीं। यह बात 1961 से लेकर 1970 तक की है। पहले यह बाटा, पगडंडी, रास्ता था। इस पैदल रास्ते से स्कूल जाते, आते मंगला जी के कई कांटे चुभे होंगे। इसकी परवाह किये बगैर उन्होंने स्कूल नहीं छोड़ा और गांव, सारजुला पट्टी की और लड़कियों को पढ़ने के लिए उन्होंने प्रेरित किया। चम्बा – टिहरी- भागरथीपुरम- कोटी कालोनी रोड 1989 के बाद बांध निर्माताओं ने बनाई। चम्बा, पुराने मोटर अड्डे टिहरी से सारजुला पट्टी के लोग पैदल ही जाते थे। घोड़ों खच्चर से सामान जाता था। सारजुल पट्टी में रुमुक पड़ते ही बाघों का डुकरना शुरू हो जाता था। फिर मंगला सजवाण नई दिल्ली पिता के पास चली गई। पिता मातबर सिंह सजवाण फ़ौज में असफर रहे। उनकी वीरता के लिए उन्हें सेना से शौर्य चक्र भी दिया गया था। फिर मंगला जी की शादी #भोलेमहाराजजी से हो गई। भोले महाराज, का जन्म 27 जुलाई 1953 में हरिद्वार में हंस जी महाराज और माता राजराजेश्वरी देवी के घर हुआ । मौजूदा समय में देश के 28 राज्यों में #हंस_फाउंडेशन और माता मंगला जी कल्याण कारी कार्य कर रही हैं। खास कर उत्तराखण्ड में 500 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास के लिये खर्च किये जा रहे हैं।

आस पास के गांवों के लोगों से उस पगडंडी के बारे में पूछा जिसमें माता मंगला स्कूल जाया करती थीं। फोटो में यही वह पहाड़ी है जहाँ मंगला जी स्कूल पैदल जाती थीं। 29 अक्टूबर 2005 को उनका स्कूल डूब गया।
हमारा डिग्री कालेज भी डूब गया।

पैसा तो सबके पास होता है। कुछ लोग अमरीका, यूरोप बस जाते हैं। गांव , ब्लॉक, जिले, राज्य से कटे रहते हैं। लेकिन ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो सच्चाई में दूसरों के लिए जीते हैं। सैकड़ों हज़ारों रोगियों के फरिश्ते बनते हैं। हॉस्पिटल में चेक पहुँचाते हैं। मंगला जी ने अपने सार ( ससुराल )सतपुली पौड़ी गढ़वाल में एक अत्याधुनिक
हॉस्पिटल बनाया है। जो एक ऐतिहासिक काम है। दया और मानवता की जीवंत मूूूूर्ति माता मंंगला जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए हम उनके दीर्घायु होने की कामना करते हैं।