Home उत्तराखंड चिंताजनक: उत्तराखंड में इंसान और वन्यजीवों में जिंदगी की जंग

चिंताजनक: उत्तराखंड में इंसान और वन्यजीवों में जिंदगी की जंग

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कुलदीप रावत
 वन्य जीव और इंसानों के बीच जीवन को लेकर हमेशा से संघर्ष रहा है। जैसे-जैसे मानव जंगल काटकर बस्ती बसाते गए, वैसे वैसे जानवरों के रहने के लिए जगह कम होती गई और जानवर भी तब पानी और भोजन की तलाश में मानव बस्ती के  इर्द-गिर्द ही मंडराता रहा है।  उत्तराखंड में इंसान और वन्य जीवों का संघर्ष निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। आपसी संघर्ष का यह सिलसिला एक ज्वलंत समस्या का रूप ले रहा है। एक ओर इंसान, जंगली जानवरों का शिकार हो रहे हैं तो दूसरी ओर जंगली जानवर भी इंसानों के हाथों से शिकार हो रहे हैं। आये दिन इंसान और वन्य जीव संघर्ष निरंतर बढ़ता जा रहा है, जो कि एक चिंता का विषय है। प्रदेश में इंसानी मौतों के साथ ही बाघों और गुलदार को लेकर भी हालात बेहद चिंताजनक हैं।

राज्य बनने से लेकर अब तक अगर बात की जाए तो 1179 गुलदारों ने अपनी जान गंवाई है। जिसमें 50 प्रतिशत गुलदार किसी दुर्घटना के चलते मरे हैं। साथ ही हाथियों की स्थिति पर गौर करें तो राज्य में अब तक 399 हाथियों की मौत हो चुकी है। हाथियों की मौत में दुर्घटनाओं का आंकड़ा 50 प्रतिशत से भी ज्यादा है। साल 2012 से अब तक करीब 326 लोग जंगली जानवरों के हमले में अपनी जान गवा चुके हैं। जबकि 13 सौ से ज्यादा लोग इन हमलों में घायल हुए हैं। इंसानों में सबसे ज्यादा जान गंवाने वाले पहाड़ी क्षेत्र से हैं। यहां पर जंगलों में लोगों के घर होना और पहाड़ों पर बसे गांवों में विद्युतीकरण न होना, स्कूली बच्चों का जंगल के मार्गों से अकेले स्कूल जाना और जंगलों में घास के लिए गई महिलाओं पर गुलदार का हमला होना, तमाम तरह के कारणों से यह ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है।  निरन्तर होती घटनाओं को वन महकमा भी हालात का दुखद पहलू मानता है कि वन्यजीव और मानवों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।

वहीं वन विभाग के मुखिया, प्रमुख वन सरंक्षक जयराज सिंह का कहना है कि वन महकमा लगातार ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए प्रयास कर रहा है। इसके लिए वन महकमे ने तमाम जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए हैं। विभिन्न फोर्स तैयार कर इस संघर्ष को रोकने की कोशिश भी की है। उनका कहना है कि जहां पर ऐसी कोई घटना सामने आती है तो वहां पर तुरंत फ़ोर्स पहुंचा दी जाती है। वैसे, जानवर और इंसान दोनों को सुरक्षित रहना है तो इंसानों को वन्यजीव प्राणियों से बचने के लिए सचेत रहना होगा। हालांकि विषम परिस्थतियों में जानवरों को मार भी दिया जाता है। चारों तरफ पहाड़ों से घिरे हुए पहाड़ी प्रदेश उत्तराखंड का 71 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र का है। इसके आसपास रहने वाले लोगों की संख्या लाखों में है। ऐसे में जंगली जानवरों का सिकुड़ता क्षेत्र कई बार उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों में ले आता है, जिस कारण वन्यजीव और मानव के बीच संघर्ष बढ़ता है। इसके अलावा जंगलों में मानवों का बढ़ता अतिक्रमण तथा जंगलों में  जंगली जानवरों को आसानी से भोजन न मिल पाना जैसे कारण भी इसमें शामिल हैं।

दूसरी ओर सबसे अहम कारण पलायन का भी है, जिससे खाली होते घरों और खेतों में आसानी से जंगली जानवरों की धमक बढ़ रही है और सुनसान जगहों पर भी दुर्घटना बढ़ रही हैं। उत्तराखण्ड में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण साल 2006 से अब तक कुल 193 गुलदार इंसानों के लिए खतरनाक घोषित किए जा चुके हैं। 18 बाघों को 2006 से अब तक इंसानी जीवन के लिए खतरा माना जा चुका है। इसी तरह 3 हाथी भी इंसानों के लिए खतरनाक घोषित हो चुके हैं. यानी कुल 214 जंगली जानवरों को इंसानों के लिए खतरनाक मानकर इन्हें चिन्हित किया गया है।