Home संस्कृति दून में 15 दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन ‘विरासत’ का रंगारंग शुभारंभ

दून में 15 दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन ‘विरासत’ का रंगारंग शुभारंभ

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देहरादून– रीच संस्था की तरफ से यहां आयोजित 15 दिवसीय सांस्कृतिक समारोह ‘विरासत’ का शुक्रवार को रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में छोलिया नृत्य के साथ ही पंडित विश्व मोहन भट्ट और सलिल भट्ट की जुगलबंदी की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हज़ार साल पुराने छोलिया नृत्य की उत्पत्ति ख़ासिया साम्राज्य में हुुई। यह नृत्य दसवीं शताब्दी से प्रचलन में है, जब विवाह तलवारों की नोक पर हुआ करते थे। बाद में यह नृत्य राजपूत घरानों में प्रचलन में रहा। पुरानी परंपराओं को जीवित रखते हुए इस नृत्य में राजपूत लोग विवाह के समय अपने यहां से दुल्हन के घर तक नाचते हुए जाते हैं।  यह नृत्य विशेष रूप से पुरुषों द्वारा संचालित किया जाता है। यह नृत्य तलवारों और ढालों के साथ जोड़ी में किया जाता है।स्पर्श जनजाति सामाजिक सांस्कृतिक संस्था चकराता ने भगत सिंह राणा के कुशल मार्गदर्शन में छोलिया नामक लोक नृत्य का प्रदर्शन किया। उद्घाटन नृत्य महासू देवता के लिए प्रार्थना थी। प्रार्थना में नृत्य के साथ दमाऊ, ढोल और रणसिंघा भी शामिल थे। इसके बाद उन्होंने तांडी नृत्य का प्रदर्शन किया, जो शादी और त्यौहारों का जश्न मनाने वाला नृत्य था। सुंदर पारंपरिक पोशाक में भाग लेने वाले जोड़ों ने इस विरासत उत्सव की शान में चार चांद लगा दिए।

 

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शुभारंभ के बाद विशेष प्रस्तुति में ग्रैमी अवार्ड से सम्मानित एवं मोहन वीणा के निर्माता विश्व मोहन भट्ट एवं उनके पुत्र सलिल भट्ट ने अपनी मोहन वीणा की जुगलबंदी से दर्शकों का मन मोह लिया । मोहन वीणा की ऐसी जुगलबंदी का आनंद लेने का देहरादूनवासियों के लिए ऐसा पहला अवसर रहा। विश्व मोहन भट्ट जी पूरी दुनिया को पहले ही अपनी शैली का दीवाना बना चुके हैं ।
विश्व मोहन भट्ट ने पश्चिमी हवाईयन गिटार के अपने सफल संयोजन द्वारा सितार, सरोद और वीणा तकनीकों से अपने सम्पूर्ण आत्मसात के द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगीत-प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया है। एक सुविकसित डिज़ाइन देकर एवं 14 अतिरिक्त तार जोड़कर विश्व मोहन ने मोहन वीणा को विशेष प्रकार से बनाया है । प्रभावशाली गति और दोषरहित लय के साथ भट्ट निस्संदेह दुनिया में सबसे अधिक और महान स्लाइड प्लेयर में से एक हैं।विश्व मोहन ने संयुक्त राज्य अमेरिका, यूएसएसआर, कनाडा, ग्रेट ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, स्कॉटलैंड, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क, दुबई,  अल.शारजाह, बहरीन, मस्कट व अबू धाबी आदि एवं भारत भर में प्रदर्शन किया हैविश्व मोहन भट्ट  के पुत्र एवं सात्विक वीणा के निर्माता सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा को पूरी तरीके से लकड़ी से बनाया है । जिसका आकार गिटार से मिलता जुलता है । लकड़ी से बने होने के कारण सात्विक वीणा का स्वर भारी हो जाता है और यही इस सात्विक वीणा की विशेषता है। सलिल भट्ट को श्स्लाइड टू फ्रीडम के लिए कनाडा में संगीत के सबसे प्रसिद्ध अवार्ड श्जूनो अवार्ड्स से भी सम्मानित किया गया है।
इस एल्बम में सलिल ने कनाडियन ब्लूज लीजेंड डॉग कॉक्स के साथ मिलकर ब्लूज संगीत एवं भारतीय संगीत का समायोजन दर्शाया है।कार्यक्रम की शुरुआत स्वरचित विश्वरंजिनी नामक नए राग से की। यह कर्नाटक और हिंदुस्तानी संगीत का एक संयोजन है। यह संदेश देता है कि संगीत क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जा सकता।
इसके बाद अपने ग्रैमी विजेता एल्बम से अपनी रचना मीटिंग बाय द रिवर्स बजाई। फिर सलिल भट्ट भोपाली पहाड़ी में धुन बजाते रहे। इसके बाद उन्होंने वैष्णव जन महात्मा गांधी के पसंदीदा भजन और वन्दे मातरम की प्रस्तुति भी दी, जिस पर दर्शक बार-बार ताली बजाने को मजबूर हुए। तबले पर उनका साथ दिया मेस्ट्रो बिस्मिल्लाह खान अवार्ड से सम्मानित हिमांशु महंत ने ।