Home उत्तराखंड हिमालयी राज्यों के विकास का खाका एक समान होना चाहिए- सीएम रावत

हिमालयी राज्यों के विकास का खाका एक समान होना चाहिए- सीएम रावत

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                 ऋषिकेश-  मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र सिंह रावत का  कहना है कि केंद्र सरकार सभी हिमालयी  राज्यों के विकास को लेकर काफी गंभीर है। इसीलिए सरकार द्वारा नीति आयोग के तहत सभी राज्यों को समान अधिकार दिये गये हैं। सभी हिमालयी राज्यों की भौगोलिक स्थिति एक जैसी होने के साथ ही ये सब सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं, इसलिए सभी राज्यों के विकास का खाका एक जैसा होना चाहिए। यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने  पंचायत राज विभाग उत्तराखंड, ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा भारत सरकार नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायत राज द्वारा ग्राम पंचायत विकास योजना अभियान के तहत ‘‘हिमालयी राज्यों में सामाजिक व आर्थिक रूपांतरण’’ विषय पर ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का गुरुवार को शुभारंभ करते हुए मुख्य वक्ता के रूप में कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाालयी राज्यों के विकास के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है और  उसने सभी राज्यों को समान दृष्टि से बजट भी आवंटित किया है। श्री रावत ने कहा कि हिमालयी राज्य सामरिक  दृष्टि से भी देश के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनकी समस्याएं भी एक जैसी हैं, इसलिए सभी के लिए नीति भी समान होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि उत्तराखंड में इस प्रकार की कार्यशाला आयोजित की गई है,  अधिकारियों को इस कार्यशाला का लाभ  मिलेगा।    भारत सरकार के ग्राम पंचायत सचिव आलोक ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देशभर में इस प्रकार की पांच कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। यह दूसरी कार्यशाला है जिसमें सभी हिमालय राज्यों के  अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें केंद्र सरकार के स्लोगन ‘सभी की योजना सबका विकास’ के अंतर्गत योजनाएं बनाई जाएंगी, जिससे हिमालयी राज्यों के सभी गांवों को विकास की दृष्टि से जोड़ा जा सके। कार्यशाला के पहले सत्र को उत्तराखण्ड के पंचायत राज मंत्री  अरविंद पाण्डे व भारत सरकार के पंचायत राज मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव  संजय सिंह व निदेशक, पंचायत राज उत्तराखण्ड  एच.सी.सेमवाल ने भी सम्बोधित किया।कार्यशाला के पहले दिन तीन तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। पहले तकनीकी सत्र में ‘ग्राम पंचायत विकास योजना निर्माण के लिए जन योजना अभियान’ विषय पर चर्चा की गई। जिसमें संजय सिंह, अतिरिक्त सचिव, पंचायत राज मंत्रालय भारत सरकार, डा.बाला प्रसाद, विशेष सचिव (से.नि.), पंचायत राज मंत्रालय भारत सरकार व डा. ए.के.भंजा, एसोसिएट प्रोफेसर, एन.आई.आर.डी.पी.आर. ने प्रतिभाग किया।
दूसरे तकनीकी सत्र में ‘‘हिमालयी राज्यों में जन योजना अभियान के माध्यम से विस्तृत जीपीडीपी प्राप्त करना’’ विषय पर चर्चा की गई। इसमें डा.बाला प्रसाद, विशेष सचिव (से.नि.), पंचायत राज मंत्रालय भारत सरकार,  आलोक प्रेम नागर, संयुक्त सचिव पंचायत राज मंत्रालय, भारत सरकार, डा. राजीव बंसल, एसआईआरडी, हिमाचल प्रदेश ने प्रतिभाग किया । साथ ही जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखण्ड के सरपंचों व प्रधानों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गये।तीसरा तकनीकी सत्र ‘‘जीपीडीपी के साथ विभिन्न योजनाओं व कार्यक्रमों का संमिलन (कन्वर्जेंस)’’ विषय पर आयोजित किया गया। इसमें जीबी पंत इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के वैज्ञानिक डा. आरसी सुंदरियाल, सीआईटीएच, मुक्तेश्वर के डा. राज नारायण, डीआईएचएआर डीआरडीओ के डा. आनंद कुमार कटियार और पीसीआरआई भेल के पूर्व एजीएम डा. नरेश श्रीवास्तव, ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार में संयुक्त सचिव सुश्री लीना जौहरी, आयुष मंत्रालय में नेशनल मेडिकीनल प्लांट्स बोर्ड के सीईओ डा. तनुजा मनोज, इंडीयन इंस्टीट्यूट ऑफ सॉयल एंड वाटर कन्जरवेशन के निदेशक डा. चरण सिंह, वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक डा. कलाचंद सैन,  हिमालयन फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक डा. एस.एस.सामंत व कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव राजेश वर्मा ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में हिमालयी राज्य जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम व अरुणाचल प्रदेश राज्यों द्वारा एक्शन प्लान की प्रस्तुति भी दी गई।