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डॉक्टर को महंगा पड़ गया मरीज़ को बाहर की दवा लिखना

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हल्द्वानी -एक सरकारी डॉक्टर को मरीज़ को अस्पताल से दवा दिलाने की बजाय बाहर की दवा लिखना उस वक्त महंगा पड़ गया जब छापे के दौरान वह जिलाधिकारी की पकड़ में आ गया. डी एम की लताड़ पड़ने पर डॉक्टर को दवा की कीमत खुद चुकानी पड़ी. मामला यहां के शोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय का है. गत दिवस नैनीताल के जिलाधिकारी सविन बंसल ने अचानक सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय में छापा मारकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों द्वारा जेनरिक दवा ना लिखने व बाहर से दवा लिखने पर नाराजगी जताते हुए चिकित्सक डा. सीएस भटट को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश देने के साथ ही गरीब मरीज को प्राइवेट दुकान से दवा लिख कर खरीदवाने पर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. हरीश लाल से मरीज को दवा के नगद 700 रूपये मौके पर ही दिलवाये। उन्होंने चिकित्सालय में गन्दगी पर सफाई ठेकेदार विपिन काण्डपाल पर 20 हजार जुर्माना व चिकित्सालय की रसोईघर में व्याप्त गन्दगी पर ठेकेदार सचिन जोशी पर भी 5 हजार रुपए का जुुर्माना लगाया। इस दौरान अस्पताल के करीब 25 से अधिक अधिकारी व कर्मचारी अनुपस्थित मिले, जिनका डीएम ने वेतन रोकने के निर्देश मौके पर ही दिये।
जिलाधिकारी श्री बंसल ने बेस चिकित्सालय में भर्ती मरीजों का हालचाल भी जाना। इस दौरान मरीजों व उनके तीमारदारों ने डीएम को बताया कि चिकित्सक छोटी-छोटी पर्चियों के माध्यम से बाहर के मैडीकल स्टोरों से दवायें मंगवाने के लिए उन्हें विवश करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल के शौचालयों की सफाई भी नियमित रूप से नहीं होती है व बेड की चादरें भी रोज नहीं बदली जाती हैं। इस पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुये चेतावनी दी कि दोबारा निरीक्षण के दौरान इस प्रकार की खामियां पायी गई तो कठोर कार्यवाही की जायेगी।
निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्साधिकारी डा. भारती राणा,प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. हरीश लाल,नगर आयुक्त सीएस मर्तोलिया, उप जिलाधिकारी विवेक राय, सिटी मजिस्टेट प्रत्यूष सिंह, अपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एमएम तिवारी,डा. डीएस पंचपाल,डा. ऊषा भट्ट व खाद्य सुरक्षा अधिकारी सहित अनेक चिकित्सक एवं स्टाफ उपस्थित थे।