Home उत्तराखंड आपदा न्यूनीकरण में सेंडई रूपरेखा तैयार करने के निर्देश

आपदा न्यूनीकरण में सेंडई रूपरेखा तैयार करने के निर्देश

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नई टिहरी- जिलाधिकारी डाॅ. वी. षणमुगम द्वारा गत दिवस नई टिहरी स्थित एनआईसी कक्ष में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सभी जिला स्तरीय अधिकारियों एवं तहसीलों के उप जिलाधिकारियों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेण्डई रूपरेखा के क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने निर्देश दिये कि कार्ययोजना में आपदा से हो रहे नुकसान को कम किये जाने हेतु आपदा से पूर्व, आपदा के दौरान एवं आपदा के बाद किये जाने वाले कार्यांे को शामिल किया जाय। उन्होंने सेण्डई रूपरेखा के सात उद्देश्यों को ध्यान में रखकर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि हम प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदा से हो रहे नुकसान को कम करने में तभी सफल रहेंगे जब हम आपदा से पूर्व ही ऐसे उपाय करेंगे जिससे आपदा के दौरान नुकसान कम हो। जैसे भूकम्प रोधी भवनों का निर्माण, आपदा से निपटने हेतु व्यापक जागरूकता एवं पूर्व तैयारियां। वहीं आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य सम्बन्धी त्वरित कार्यवाही व आपदा के बाद नुकसान की भरपाई के लिए कार्ययोजना का निर्माण आवश्यक है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन इस प्रकार करें कि योजनाएं आपदाओं का कारण न बनें। साथ ही जो निर्माण अथवा विकास कार्य हों, वे प्राकृतिक आपदा को झेलने में सक्षम हों। जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि अपने क्षेत्रान्तर्गत विभिन्न विभागों में उपलब्ध सुरक्षा उपकरणों, औजारों एवं अन्य संसाधनों के ब्योरे के एकत्रीकरण को भी कार्ययोजना में शामिल किया जाय क्योंकि उपलब्ध संसाधनों की जानकारी रहने पर ही उनको उपयोग में लाया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिये कि क्षेत्रान्तर्गत स्थित मेडिकल स्टोरों व किराना की दुकानों में उपलब्ध दवाईयों/वस्तुओं के ब्योरों को भी प्रतिमाह लिया जाना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर सहयोग लिया जा सके। स्वयंसेवी संस्थाओं से एवं रिसर्च संस्थाओं से किस प्रकार आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहयोग लिया जा सकता है, इसको भी कार्ययोजना में प्रस्तुत किया जाय। जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि आपदा के दौरान तहसील प्रशासन द्वारा किये जा रहे कार्यों की सही व सटीक जानकारी समय पर मीडिया को उपलब्ध हो, इसे भी कार्ययोजना में शामिल किया जाय।
बता दें कि सेण्डई रूपरेखा एक प्रगतिशील ढांचा है। इसका उद्देश्य सन् 2030 तक आपदाओं के कारण महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचें को होने वाले नुकसान एवं प्रभावितों की संख्या को कम करना है। सेण्डई रूपरेखा के सात उद्देश्य जिन्हें हासिल करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जानी है, में आपदा से होने वाली मृत्युदर में काफी कमी, आपदा प्रभावित लोगों की औसत संख्या को कम करना, सकल घरेलू उत्पाद के सापेक्ष आपदा से होने वाली आर्थिक क्षति में कमी, क्षति के साथ ही स्वास्थ्य और शैक्षणिक सुविधाओं एवं महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सेवाओं पर आपदाओं से होने वाले व्यवधानों में कमी, स्थानीय, जनपद व राज्य स्तर पर आपदा जोखिम रणनीति अपनाने वाली संस्थाओं व विभागों की संख्या में वृद्धि, इस रूपरेखा के क्रियान्वयन के लिए जनपदों के मध्य सहयोग को बढ़ावा एवं आपदा पूर्व चेतावनी तंत्र का सुदृढ़ीकरण तथा लोगों तक चेतावनी का प्रसारण शामिल हैं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आशीष भटगांई, सीएमओ भागीरथी जंगपांगी, जिला विकास अधिकारी आनन्द सिंह भाकुनी, अधीक्षण अभियन्ता एनपी सिंह, मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी सेमवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।