Home उत्तराखंड पहली पुण्यतिथि पर याद किए गए जन आंदोलनों के नायक डॉ. शमशेर...

पहली पुण्यतिथि पर याद किए गए जन आंदोलनों के नायक डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट

60
0

         

 अल्मोड़ा- ‘शराब नहीं, रोजगार दो’ जैसे अनेक जन आंदोलनों के नायक रहे स्वर्गीय शमशेर सिंह बिष्ट की पहली पुण्यतिथि  पर यहां  स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। रैमजे इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का आगाज ‘हम लड़ते रैया भुला, हम लड़ते रूलो’ जनगीत के साथ हुआ। इस समारोह में देशभर से कई सामाजिक हस्तियों ने भागीदारी की।समारोह के मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि आज समाज में कई तरह की चुनौतियां सामने हैं। उन्होंने कहा कि दिन पर दिन पर्यावरण का जिस तरह से दोहन हो हरा है उसके गंभीर परिणाम आने वाले 40-50 सालों में सामने आने लगेेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता भूषण ने कहा कि व्यक्ति की बदलती जीवनशैली का प्रभाव भी पर्यावरण पर पड़ रहा है इसलिए सभी लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए एक साथ आगे आना होगा। समारोह के प्रथम सत्र का संचालन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह ने कहा कि डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट का जो रास्ता था उसका कोई नतीजा निकलना चाहिए। प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने सभी राजनीतिक धाराओं को एक मंच पर समेटते हुए जनांदोलनों को एक धार देने का कार्य किया। इन आंदोलनों का समाज में व्यापक असर हुआ कई समस्याओं का समाधान हुआ। प्रख्यात इतिहासकार शेखर पाठक ने कहा कि आज के दौर में शमशेर सिंह बिष्ट ज्यादा प्रासंगिक हो गये हैं क्योंकि बोलने की प्रथा समाप्त होती जा रही है।

जलपुरुष के नाम से पहचाने जाने वाले राजस्थान से पहुंचे राजेंद्र सिंह ने सभागार में बैठे लोगों का ध्यान दुनिया में पानी तथा वातावरण परिवर्तन पर डाला। उन्होंने कहा कि दुनिया जलवायु परिवर्तन के मुहाने पर खड़ी है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेशध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने पहाड़ की बदहाल व्यवस्था पर सोचने की बात कही। राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि उन्होंने डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट के साथ कॉलेज से संघर्ष शुरू किया।  हालांकि वह आज एक राजनीतिक दल से जुड़े हैं पर डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने जो एक संघर्ष का बीज उनके अंदर बोया है, वह हमेशा जन समस्याओं से जुड़े आंदोलनों में लड़ने की प्रेरणा देता है। अंत में स्व. शमशेर सिंह बिष्ट की पत्नी रेवती बिष्ट ने देशभर से पहुंचे लोगों का आभार व्यक्त किया। प्रथम सत्र का समापन करते हुए दयाकृष्ण कांडपाल ने कहा कि उत्तराखंड लोक वाहिनी एक संगठन नहीं बल्कि यह एक विचारधारा है। ऐसी विचारधारा जिसमें राजनीतिक व सामाजिक समस्याओं के निराकरण के साथ लोगों को जनमुद्दों से जोड़ने का कार्य किया जाता है। इस अवसर पर कपिलेश भोज द्वारा जननायक डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट पर लिखित पुस्तक ‘जननायक शमशेर सिंह बिष्ट’ का विमोचन किया गया। प्रथम सत्र की समाप्ति के बाद जनगीत गाते हुए रैमजे इंटर कॉलेज से मुख्य बाजार, लाला बाजार, मिलन चौक होते हुए शिखर तिराहे तक जुलूस निकाला गया। जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर कुमार कलानंद मणि, एके असण, राजस्थान से राजेंद्र सिंह, गांधी शांति प्रतिष्ठान की पूर्व सचिव आनंदी बहिन, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, रवि चोपड़ा, पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल, पूर्व विधायक मनोज तिवारी, पुष्पेश त्रिपाठी, उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी, राजा बहुगुणा आदि ने कार्यक्रम को संबोधित किया। समारोह का द्वितीय सत्र शिखर होटल के सभागार में आयोजित किया गया। 
इस अवसर इंद्रेश मैखुरी, चारू तिवारी, जमन सिंह बिष्ट, मनमोहन चौधरी, जयमित्र बिष्ट, अजयमित्र बिष्ट, प्रो देव सिंह पोखरिया, उदय किरौला, ईश्वर दत्त जोशी, हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डीके जोशी, प्रो. दिवा भट्ट, वीपीकेएएस के पूर्व निदेशक डॉ. जगदीश चंद्र भट्ट, नवीन पाठक, नीरज पंत, डॉ ललित जोशी, अजय प्रकाश, रेखा धस्माना, आनंदी वर्मा समेत कई लोग मौजूद थे।