Home उत्तराखंड पोखरी नगर पंचायत के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी में घमासान

पोखरी नगर पंचायत के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी में घमासान

44
0

नीरज कण्डारी

चमोली। नगर पंचायत पोखरी के कार्यालय में इन दिनों घमासान मचा हुआ है। यहां अधिशासी अधिकारी ने अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद पंत के  बेटे मयंक पंत पर उनके ऑफिस में आकर धमकाने और जान से मारने का आरोप लगाया है। अधिशासी  अधिकारी नंद राम तिवारी ने कहा कि अध्यक्ष का बेटा ऑफिस में आकर हर सरकारी कार्य में बाधा डालता है और कहता है ‘‘जैसे में चाहता हूँ, वैसे ही ऑफिस चलेगा। ईओ ने कहा कि मेरे साथ ही ऑफिस के पूरे स्टाॅफ को धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का बेटा कहता है- जनता ने मुझे अध्यक्ष बनाया है, इसलिए इस कार्यालय में मेरी चलेगी। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का बेटा कार्यालय में आकर जोर-जबर्दस्ती सरकारी फाइलों और कागजातों में हस्ताक्षर करवाना चाहता है, उनके द्वारा किए जा रहे ठेके और अन्य निर्माण कार्यों को मनमुताबिक अपने चहेतों को दिलाने के लिए हमारे उपर दबाव बनाया जाता है। ऐसा न करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए जिलाधिकारी चमोली से सुरक्षा की मांग की है। उधर अध्यक्ष के बेटे मयंक पंत का कहना है कि वह जनता के कार्याें के लिए नगर पंचायत कार्यालय में जाते हैं। उन्होंने अधिशासी अधिकारी के  आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मेरे द्वारा किसी भी प्रकार की धमकी नहीं दी गई है।

 

पोखरी नगर पंचाायत के अध्यक्ष पद पर आसीन होने के बाद से ही लक्ष्मी प्रसाद पंत की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनके विरोधी लगातार उनको घेरने में लगे हुए हैं। अतिक्रमण को लेकर भी एक मामला कोर्ट में चल रहा है, जिसमें लक्ष्मी प्रसाद पंत का अध्यक्ष पद दांव पर लगा हुआ है। अब उनके बेटे द्वारा अधिशासी अधिकारी को जान से मारने की धमकी देने वाला विवाद उनकी मुश्किलों में और इजाफा कर सकता है। बताया जा रहा है कि पोखरी नगर पंचायत के विकास कार्यों में भारी गड़बड़झाला है। यहां विकास कार्यों के लिए आवंटित धन की जमकर बंदरबांट होती है। अध्यक्ष और उनके बेटे तथा नगर पंचायत ईओ के बीच चल रही तकरार की मूल जड़ भी यही है। हालांकि अध्यक्ष का बेटा ईओ को भ्रष्ट बता रहा है तो ईओ, अध्यक्ष और उनके बेटे को। लेकिन सच्चाई तो यह है कि भ्रष्टाचार की इस लड़ाई में कोई भी कम नहीं है। उच्चाधिकारियों को इस मामले में गम्भीरता से संज्ञान लेना चाहिए और पूरे नगर पंचायत  की जांच कर दोषियों के खिलाफ  कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि जनता की सेवा के लिए चुने हुए प्रतिनिधि और लोकसेवक जनहित के कार्यों को छोड़कर भ्रष्टाचार-भ्रष्टाचार न खेलें।