Home Home बलिदान दिवस पर बाबा मोहन उत्तराखंडी का भावपूर्ण स्मरण

बलिदान दिवस पर बाबा मोहन उत्तराखंडी का भावपूर्ण स्मरण

118
0

देहरादून- उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैण में बनाये जाने की मांग को लेकर आमरण अनशन करने वाले बाबा मोहन उत्तराखंडी ( वास्तविक नाम मोहन सिंह नेगी ) ने आज के ही दिन अपने जीवन का बलिदान दिया था. 2 जुलाई 2004 को बेनीताल ( चमोली जनपद ) में आमरण अनशन शुरू करने वाले राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता बाबा मोहन उत्तराखंडी ने पूरी तरह से अन्नजल त्याग दिया था लेकिन तत्कालीन एन डी तवारी सरकार ने उन की सुध लेने की जहमत नहीं उठायी. आख़िरकार अनशन के 39 वें दिन सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने उन्हें जबरन अनशन से उठाने की कोशिश की लेकिन बाबा की हठ के आगे उसकी एक न चली तो बड़ी क्रूरता के साथ उनकी पिटाई की गयी और उन्हें घसीटते हुए वहां से उठा लिया गया. इस दौरान उनके साथ प्रशासनिक अमले के द्वारा जो बर्बरता की गयी, उसकी वज़ह से रास्ते में ही बाबा के प्राण पखेरू उड़ गए. स्थायी राजधानी के लिए प्राणों की आहुति देने वाले ऐसे क्रन्तिकारी शहीद बाबा उत्तराखंडी को आज ज्ञात-अज्ञात कारणों से लगभग भुला ही दिया गया है. बाबा मोहन उत्तराखंडी को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धाजंलि के तौर पर मासिक पत्रिका पर्वतांचल में प्रकाशित कवि,लेखक एवं पत्रकार चन्दन सिंह नेगी के एक पुराने का छायाचित्र प्रस्तुत कर रहे हैं.