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करोड़ों की कीमत चुकानी पड़ती है जिला पंचायत का अध्यक्ष बनने को

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देहरादून- उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की घुन अब लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी खोखला करने लगी है। स्थिति यह हो चुकी है कि जिला पंचायत का अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए भी करोड़ों रुपए चुकाने पड़ते हैं। टिहरी के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रतन सिंह गुणसोला का यही मत है। गुणसोला ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जिस प्रकार त्रिस्तरीय चुनाव में ग्राम प्रधान और नगर पालिका एवं महापालिका में अध्यक्ष पद के लिए सीधे चुनाव होता है, उसी तर्ज पर जिला पंचायत अध्यक्ष एवं क्षेत्र पंचायत प्रमुख का भी सीधा चुनाव जनता द्वारा कराया जाना चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि इन पदों को पाने के लिए उत्तराखंड में कहीं-कहीं पर 30 से 40 करोड़ रुपए तक सदस्यों में बांटे जाते हैं जिसके कारण क्षेत्र एवं प्रदेश विकास की मुख्यधारा से पिछड़ जाता है.

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ने एक सवाल के जवाब में बताया कि टिहरी में उनके कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। किंतु प्रस्ताव गिर गया था और उन्होंने पहले से अधिक मतों से जीत हासिल की थी। लेकिन उनमें से अधिकांश सदस्य चाहते थे कि काम के नाम पर जो बजट उन्हें मिलता है, उसका बिना काम किए ही फर्जी तरीके से भुगतान कर दिया जाए। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं होने दिया.

रतन सिंह गुणसोला ने कहा कि इन्हीं सब महत्वपूर्ण बिंदुओं के मद्देनजर वह मुख्यमंत्री से मांग कर रहे हैं कि उत्तराखंड के जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष एवं क्षेत्र पंचायत प्रमुख का सीधा चुनाव जनता द्वारा ही कराया जाए जिससे प्रदेश का विकास होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए योग्य एवं उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों को ही अवसर प्रदान किया जाना चाहिए.