Home उत्तराखंड डेंगू को लेकर गंभीर नहीं स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम प्रशासन

डेंगू को लेकर गंभीर नहीं स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम प्रशासन

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देहरादून – शहर में डेंगू का प्रकोप दिनों-दिन विकराल रूप लेता जा रहा है। पिछले दो महीनों से सैकड़ों लोग डेंगू बुखार की चपेट में हैं। कुछ रोगियों की तो इस बीमारी ने जान तक ले ली है। बरसात के मौसम में बुखार आदि तो हर साल की कहानी रही है, परंतु इस साल जिस अप्रत्याशित स्तर पर डेंगू बुखार की पुनरावृत्ति हुई है, इसमें नगर निगम की घोर लापरवाही देखने को मिल रही है।   जानकार लोग इसके पीछे नगर निगम प्रशासन की ढीली रफ्तार को प्रमुख कारण मान रहे हैं। दरअसल, नगर निगम द्वारा शहर में समय समय पर फोगिंग नहीं की जाती। खासतौर से घनी आबादी वाली कॉलोनियों में ज़रूरत के अनुसार बचाव कार्य नहीं किया जा रहा है।और देर से ही सही लेकिन जब  फोगिंग शुरू की भी गयी तो  उसका असर भी नहीं होता दिख रहा है, इसके चलते दवा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया जाने लगा है। मेयर  के अन्य कार्यक्रमों में अति व्यस्त रहने से शहर की सफाई व्यवस्था पर ध्यान ना दे पाना भी इसकी एक वजह बताई जा रही है।
 स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े वास्तविक डेंगू के मरीजों के आंकड़ों से बहुत कम हैं, क्योंकि ज्यादातर मरीज अस्पताल में भर्ती न होकर अपने घरों में ही इलाज करवा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू के मरीजों का सही आंकड़ा पैथोलौजी लैबों में मरीजों की जांच रिकार्ड से लिया जा सकता है। लोगों का कहना है कि जनता से हर सुविधा के लिए टैक्स वसूलने वाले नगर निगम के अधिकारियों को भी हर कालोनी में जाकर साफ-सफाई की व्यवस्था और फोगिंग आदि का प्रत्यक्ष रूप से जायजा लेना चाहिए।