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उत्तर पुस्तिका में दर्ज 91 मार्क्स मार्कशीट में सिर्फ 57 रह गए

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उत्तरकाशी। उत्तराखंड में हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में एक छात्रा के अंकपत्र पर एक विषय में कम नंबर दिए जाने का मामला सामने आया है। जबकि छात्रा को इसी विषय की उत्तर पुस्तिका में अधिक नंबर मिले हुए हैं। मामला तब प्रकाश में आया जब हिंदी विषय में कम अंक आने पर छात्रा ने अपनी उत्तर पुस्तिका की छाया प्रति उत्तराखंड बोर्ड से मांगी। छात्रा के पिता रविन्द्र सिंह रावत ने शिक्षा विभाग पर घोर लापरवाही वरतने का आरोप लगाते हुए कहा है कि बोर्ड परीक्षा में छात्र रात दिन एक कर बड़ी मेहनत से पढ़ाई करते हैं। लेकिन, बोर्ड द्वारा इस तरह की लापरवाही कर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस तरह की विभागीय लापरवाही का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।मामला राजकीय कन्या इंटर कालेज बड़कोट (उत्तराकाशी) का है। जहां अध्ययनरत बड़कोट के वार्ड नंबर 2 निवासी रविंदर सिंह रावत की पुत्री वर्षा रावत ने वर्ष 2018-19 की हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा दी। विद्यालय की छात्रा वर्षा रावत का जब हाईस्कूल का रिजल्ट आया तो अंकपत्र पर हिंदी विषय में उसके 57 नम्बर आये। उसे हैरानी हुई कि उसके हिंदी विषय का पेपर अच्छा हुआ है, उसमें लेकिन इतने कम नंबर कैसे आये हैं। इस के बाद उसने नियमानुसार उत्तराखंड बोर्ड से अपने हिंदी विषय की उत्तर पुस्तिका मंगवाई। उत्तर पुस्तिका में देखा तो वर्षा रावत के हिंदी विषय में 91 नंबर मिले हुए हैं। इस हिसाब से बोर्ड की भूल के कारण वर्षा रावत को अंकपत्र पर हिंदी विषय में 34 नंबर कम दर्शाए हुए हैं। इससे छात्रा बड़ी मायूस है। छात्रा के अंकपत्र में 72 प्रतिशत है और यदि उसे हिंदी विषय में पूरे नंबर दिए जाते तो, उसका प्रतिशत 78.8 होना चाहिए था।छात्रा के पिता रविन्द्र रावत ने यहां परिषद द्वारा जारी किए गए छात्रा के अंकपत्र और उत्तर पुस्तिका की कॉपी दिखाते हुए कहा है कि उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन तो सही किया हुआ है। लेकिन, मुद्रण में त्रुटि हुई है, जिस कारण उनकी पुत्री को हिंदी विषय में उत्तर पुस्तिका में 91 किंतु अंकपत्र में मात्र 57 नंबर दिए गए हैं ।