Home देश सुप्रीम कोर्ट: चुनाव में दागी उम्मीदवारों का प्रोफाइल सार्वजनिक करना अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट: चुनाव में दागी उम्मीदवारों का प्रोफाइल सार्वजनिक करना अनिवार्य

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नई दिल्ली- देश की मौजूदा राजनीति में आपराधिक तत्वों की बढ़ती घुसपैठ को रोकने के लिए न्याय पालिका आगे आयी है। इसी संदर्भ में  सुप्रीम कोर्ट ने  एक महत्वपूर्ण पहल की है। चुनाव लड़ने वाले आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को लेकर  सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने गुरूवार को राजनीति में अपराधीकरण पर चिंता जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि आम चुनावों में दागी नेताओं का आकंड़ा बढ़ गया है। इस पर रोक लगाने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को कहा गया कि आपराधिक बैकग्राउंड वाले उम्‍मीदवारों का चयन करने के 72 घंटों के भीतर उनकी पूरी प्रोफाइल पार्टी की वेबसाइट पर अपलोड करें।
 न्यायमूर्ति रोहिन्टन फली नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सियासी दल उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की विस्तृत जानकारी फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, क्षेत्रीय भाषा के एक अखबार और एक राष्ट्रीय अखबार में प्रकाशित करवाएं। न्यायालय ने कहा कि सियासी दलों को ऐसे उम्मीदवार को चुनने के 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी, जिसके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि जिन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं, उनके बारे में अगर राजनीतिक दल न्यायालय की व्यवस्था का पालन करने में असफल रहते हैं तो चुनाव आयोग इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाए। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि प्रतीत होता है कि बीते चार आम चुनाव से राजनीति में अपराधीकरण तेजी से बढ़ा है।
उल्लेखनीय है कि कई याचिकाकर्ताओं में से एक बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि कोर्ट चुनाव आयोग को निर्देश दे कि वह राजनीतिक दलों पर दबाव डाले कि राजनीतिक दल आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को टिकट न दें। ऐसा होने पर आयोग राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई करे।  वहीं आयोग ने न्यायालय के वर्ष 2018 में दिए गए उस फैसले की याद दिलाई जिसके तहत उम्मीदवारों से उनके आपराधिक रिकार्ड को इलेक्ट्रॉनिक एवम् प्रिंट मीडिया में घोषित करने को कहा गया था।
 आयोग ने कहा कि राजनीति का अपराधीकरण रोकने में उम्मीदवारों द्वारा घोषित आपराधिक रिकॉर्ड से कोई मदद नहीं मिली है। साल 2018 के सितंबर माह में 5 जजों की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह गंभीर अपराध में शामिल लोगों के चुनाव लड़ने और पार्टी पदाधिकारी बनने पर रोक लगाने के लिए तत्काल कानून बनाए। आयोग ने सुझाव दिया कि उम्मीदवारों से आपराधिक रिकॉर्ड मीडिया में घोषित करने के बजाए ऐसे उम्मीदवारों को टिकट से वंचित कर दिया जाना चाहिए जिनका पिछला रिकॉर्ड आपराधिक रहा हो।