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​किसान आंदोलन: गाजीपुर बॉर्डर पर किसान ने की आत्महत्या

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सुसाइड नोट में सरकार को ठहराया जिम्मेदार, कहा किसान सुन नहीं रही
संंवाददाता
नई दिल्ली, 3 दिसंबर। शीतलहर, कोहरे और बारिश की मार झेलते हुए दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन 38वें दिन में प्रवेश कर चुका है। शनिवार को जहां सुबह बारिश ने किसानों को परेशान किया वहीं गाजीपुर बॉर्डर पर एक 75 वर्षीय किसान ने शौचालय में आत्महत्या कर ली। इससे पूरे आंदोलन स्थल पर शोक की लहर दौड़ गई है। किसान ने एक सुसाइड नोट पंजाबी में लिखकर छोड़ा है।
किसान कश्मीर सिंह का शव बिना पोस्टमार्टम के ही उनके गांव ले जाया गया। सरदार कश्मीर सिंह निवासी बिलासपुर, जनपद रामपुर के थे। जिन्होंने किसान आंदोलन में किसानों की तकलीफ और 54 किसानों की मृत्यु से आहत होकर गाजीपुर बॉर्डर पर आत्महत्या करके अपनी जान दे दी। आज भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति  के दर्जनों कार्यकर्ताओं एवं किसानों ने चिल्ला बॉर्डर धरनास्थल पर मौन धारण कर शहीद सरदार कश्मीर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की और यह संकल्प लिया कि शहीद किसानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा जब तक सरकार तीन काले कानूनों को वापस नहीं लेती है तथा एमएसपी पर गारंटी कानून नहीं बनाती है तब तक भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति अंतिम क्षण तक इस लड़ाई को लड़ती रहेगी।
किसान कश्मीर सिंह ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि मेरा अंतिम संस्कार मेरे पोते-बच्चे के हाथों यहीं दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर होना चाहिए। उनका परिवार बेटा-पोता यहीं आंदोलन में निरंतर सेवा कर रहे हैं। यूपी पुलिस ने अब सुसाइड नोट अपने कब्जे में ले लिया है। कश्मीर सिंह ने अपनी आत्महत्या के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने लिखा है कि आखिर हम कब तक यहां सर्दी में बैठे रहेंगे। इसका कारण आंदोलन के मद्देनजर इस सरकार को फेल होना बताया है और कहा है कि यह सरकार सुन नहीं रही है, इसलिए अपनी जान देकर जा रहा हूं।