Home उत्तराखंड स्मरण:  कुमाऊं के 18 जांबाजों ने आज के दिन पाकिस्तान से लोहा लेते...

स्मरण:  कुमाऊं के 18 जांबाजों ने आज के दिन पाकिस्तान से लोहा लेते हुए दी थी शहादत

151
0
प्रतीकात्मक फोटो

संवाददाता

हल्द्वानी, 29 मई।

कुमाऊं के शौर्य व पराक्रम के इतिहास में 29 मई का दिन काफी महत्वपूर्ण है। इसी दिन वर्ष 1984 में पाक सेना से लोहा लेने के दौरान कुमाऊं के एक अफसर व 17 जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आपरेशन मेघदूत के नाम से चले इस अभियान में कुमाऊं के कुल 20 योद्धाओं ने अपने प्राणों की आहूति दी थी। जिला सैनिक लीग ने शनिवार को हल्द्वानी में रह रहे आपरेशन मेघदूत के तीन शहीदों के परिवार वालों का हाल-चाल जाना।

अप्रैल 1984 में दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध के मैदान का आगाज आपरेशन मेघदूत से शुरू हुआ था। इस युद्ध में फतह के लिए कुमाऊं की कई बटालियनों को कूच कराया गया। इसमें 19 कुमाऊं को भी खेरू से कूच कराया गया। 19 कुमाऊं ने खेरू से पैदल सियाचीन पहुंचकर इतिहास रच डाला। सियाचीन बेस कैंप पर पहुंचने के बाद बटालियन को बर्फ से ढकी चोटियों पर पहुंचकर पाकिस्तानी सेना को रोकना था। इसके लिए लेफ्टिनेंट पीएस पुंडीर के नेतृत्व में 17 जवानों का दल गठित किया गया। जिला पूर्व सैनिक लीग के जिलाध्यक्ष मेजर बीएस रौतेला बताते हैं कि यह चोटी सीधी खड़ी और काफी ऊंची थी। 27 अप्रैल 1984 को यह दल जोखिम भरे सफर के लिए रवाना हो गया। 29 मई की तड़के भारी बर्फबारी की वजह से दल उसमें फंस गया और दफन हो गया। सभी जवान अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ जनपद के रहने वाले थे। आपरेशन मेघदूत में शहीद जांबाजों में से तीन के परिवार वर्तमान में हल्द्वानी में रह रहे हैं।