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किसान महापंचायत: टिकैत ने अब उत्तराखंड में भी भरी हुंकार, कार्यक्रम में उमड़ा किसानों का सैलाब 

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संवाददाता
रुद्रपुर, 01 मार्च।

उत्तराखंड के रुद्रपुर के मोदी मैदान में आज किसान महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। मैदान में अच्छी खासी भीड़ जुट गई थी। इससे भी किसान नेता गदगद नजर आए। इस दौरान टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन का मकसद किसी सरकार को गिराना या सरकार बनाना नहीं है। केंद्र सरकार का अमेरिका के साथ मिलकर चाइना को टक्कर देने का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि इसी के तहत लेबर कानूनों में भी संशोधन किया जा रहा है।


राकेश टिकैत ने कहा कि विलेज टूरिज्म पालिसी पर काम करने से पहाड़ और उत्तराखंड का किसान बचेगा। पहाड़ पर किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें बहुत दिक्कतें हैं। फसल की एमएसपी तक नहीं मिल पाती। खासकर सब्जी, फल और मोटे अनाज का उचित दाम नहीं मिलता। यही वजह है कि पहाड़ों से लगातार पलायन हो रहा है।


इस दौरान पंजाबी गायिका रूपीन्द्र हांडा ने प्रस्तुति दी। पंजाबी गीत सुनाकर उन्होंने अपना समर्थन दिया। किसान महापंचायत में पहाड़ी संस्कृति की झलक भी दिखाई दी। यहां उत्तराखंड के पारंपरिक छोलिया नृत्य के साथ किसान पहुंचे। वहीं श्रमिक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर श्रमिक ढोल-नगाड़े लेकर तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ मोदी मैदान में किसानों का समर्थन देने पहुंचे।

बाजपुर के एक भी किसान को उजड़ने नहीं देंगे

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बाजपुर में कहा कि किसानों को उजड़ने नहीं दिया जाएगा। रुद्रपुर रैली में शामिल होने के लिए जाते समय राकेश टिकैत 10 मिनट बाजपुर में रुके थे। उन्होंने दावा किया कि बाजपुर के 20 गांवों की जमीन से एक भी किसान को उजड़ने नहीं दिया जाएगा और उनकी हर संभव मदद की जाएगी। उनके पिता ने एस्कॉर्ट फार्म सहित बाजपुर की अनेकों जमीनों को बचाने का काम समय-समय पर किया है। उनका पुत्र होने के नाते उनकी भी जिम्मेदारी है कि बाजपुर की जमीनों को बचा कर रखा जाए।

उन्होंने किसान आंदोलन में शामिल होने वाले राजनीतिक व्यक्तियों के संबंध में कहा कि जो भी नेता किसानों के समर्थन में आना चाहे वह अपनी पेंशन व सरकारी सुविधा को त्याग कर हमारे साथ शामिल हो। हम उसका स्वागत करेंगे। राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए किसानों का मंच उपलब्ध नहीं होगा। राकेश टिकैत ने खाली होते पहाड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहाड़ में अच्छी खेती हो सकती है। हम चाहते हैं कि किसान पहाड़ों में खेती कर देश की सीमाओं की रक्षा में योगदान करें। टिकैत ने कहा कि पहाड़ की उन्नत किस्म की फसलें देश की खाद्यान्न  व्‍यवस्‍था को संपन्‍न करेंगी। इसे बढ़ाने के लिए उनके पास व्यापक कार्य योजना है। समय आने पर पहाड़ के किसानों के साथ भी खेती बचाओ संघर्ष की बात करेंगे। इस मौके पर जगजीत सिंह रंधावा, जगतार सिंह बाजवा, रघुवीर सिंह रंधावा, सतनाम सिंह रंधावा, अजीत प्रताप सिंह व गुरचरण सिंह समेत बड़ी संख्‍या में किसान उनके साथ मौजूद रहे।