Home उत्तराखंड जयंती: विक्टोरिया क्रॉस दरबान सिंह नेगी का स्मरण, सदन में श्रद्धासुमन अर्पित 

जयंती: विक्टोरिया क्रॉस दरबान सिंह नेगी का स्मरण, सदन में श्रद्धासुमन अर्पित 

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संंवाददाता
गैरसैंण, 04 मार्च।

युद्ध में अपने शौर्य और पराक्रम का इतिहास रचने वाले उत्तराखंड के वीर सपूत विक्टोरिया क्रॉस विजेता दरबान सिंह नेगी की जयंती पर गुरुवार को उन्हें उत्तराखंड विधानसभा में याद किया गया।।  मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल, मंत्रियों एवं विधायकों ने  भराड़ीसैंण विधानसभा में विक्टोरिया क्रॉस दरबान सिंह नेगी की जयंती पर उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये। इस मौके पर उनकी बहादुरी की चर्चा करते हुए कहा गया कि नेगी ने  युद्ध में अपनी वीरता का प्रर्दशन कर न केवल विक्टोरिया क्रॉस जैसा सर्वोच्च सम्मान प्राप्त किया बल्कि उत्तराखंड का नाम भी रोशन किया था।

कौन थे दरबान सिंह नेगी… 

दरबान सिंह नेगी का जन्म 4 मार्च, 1883 को गढ़वाल के करबारतीर गांव में हुआ था। दरबान सिंह नेगी प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन चंद भारतीय सैनिकों में से एक थे, जिन्हें ब्रिटिश राज का सबसे बड़ा युद्ध पुरस्कार “विक्टोरिया क्रॉस” मिला था। दरबान सिंह नेगी करीब 33 साल के थे और 39th गढ़वाल राइफल्स की पहली बटालियन में नायक के पद पर तैनात थे। 23-24 नवंबर, 1914 को उनकी रेजिमेंट ने दुश्मन से फेस्टुबर्ट के करीब ब्रिटिश खदंकों पर फिर से कब्जा करने की कोशिश की। इस युद्ध के दौरान उनकी भूमिका के लिए उनको ‘विक्टोरिया क्रॉस’ से सम्मानित किया गया।प्रथम विश्वयुद्ध को समाप्त हुए कई वर्ष हो गए हैं।

इस युद्ध में दुनिया भर की फौजें शामिल थीं, लेकिन इनमें भारतीय सैनिकों के साहस और वीरता ने पूरी दुनिया में एक अलग छाप छोड़ी। यही वजह थी कि जब फ्रांस में ब्रिटिश सैन्य टुकड़ियों के बीच दीवार बनी जर्मन सेना को कोई हिला नहीं पा रहा था, तब गढ़वाल के नायक दरबान सिंह नेगी के नेतृत्व वाली ब्रिटिश-भारतीय सेना ने रातों-रात इस दीवार को ढहा दिया। इस अप्रतिम विजय के लिए ब्रिटेन के किंग जॉर्ज ने स्वयं रणभूमि में जाकर दरबान सिंह नेगी को ‘विक्टोरिया क्रॉस’ दिया था। वह इस वीरता पुरस्कार को पाने वाले पहले भारतीय थे। लैंसडॉन में गढ़वाल राइफल्स के रेजिमेंटल संग्रहालय का नाम, उनके सम्मान में रखा गया है।