Home उत्तराखंड सुनवाईः आंदोलन करें लेकिन दूसरे के मौलिक अधिकारों को बाधित न करें

सुनवाईः आंदोलन करें लेकिन दूसरे के मौलिक अधिकारों को बाधित न करें

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संवाददाता

नई दिल्ली, 18 दिसंबर।

किसान आंदोलन पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसानों को अपनी जिद छोड़ देनी चाहिए और सरकार को जल्दबाजी। यानी ना तो आंदोलन की जिद चलेगी और ना ही कानून लाने की जल्दबाजी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसान सड़कों को ब्लॉक करके इस तरीके से आंदोलन नहीं कर सकते।

जबकि कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या वो कुछ दिनों के लिए इन कानूनों को रोक नहीं सकती।  कोर्ट ने कहा कि किसान अपना विरोध जारी रख सकते हैं। यह तब तक ही हो सकता है कि जब तक कि किसी की जिंदगी या संपत्ति को इससे खतरा न पहुंचता हो। इसके अलावा कोर्ट ने गतिरोध खत्म करने के लिए एक कमेटी बनाने का सुझाव दिया।

जब अदालत में सुनवाई शुरू हुई तो सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हां और ना किसी सवाल का जवाब नहीं हो सकते। सरकार को कोई ऐसा व्यक्ति चाहिए जो दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर सके और इस बर्फ को पिघलाया जा सके। इसके लिए कमेटी की बजाय समाज के कुछ जाने माने लोगों की मदद ली जा सकती है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों की तरफ़ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे मौजूद थे। उन्होंने कहा कि इस तरह से रास्ते रोककर दिल्ली की धमनियों को ब्लॉक नहीं किया जा सकता, क्योंकि आवाजाही बंद होने से पड़ोसी राज्यों में भी चीज़ों के दाम बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं।

इस पर दिल्ली सरकार के वकील की तरफ से कहा गया कि दिल्ली में प्रवेश के 120 से ज्यादा रास्ते हैं। इस पर सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सड़कों को बंद करने से आम लोगों के मूल अधिकारों का हनन हो रहा है। किसान 6 महीने तक रुकने की तैयारी करके आए है। शहर की तरफ़ आने वाले रास्तों को इस तरह से तो सिर्फ युद्ध के समय में ही बंद किया जा सकता है। सरकार की तरफ़ से ये भी कहा गया कि ये संविधान के आर्टिकल 19 के तहत लोगों को अपनी मर्जी से कहीं भी आने जाने की आजादी का भी उल्लंघन है। सरकार के वकीलों ने ये भी दलील दी कि आंदोलन कर रहे किसान मास्क नहीं लगा रहे हैं और इससे कोरोना वायरस तेजी से फैलेगा और इसके पूरे देश में भी फैलने का खतरा है।

इसके बाद सुनवाई कर रही बेंच ने कहा कि कोर्ट एक स्वतंत्र कमेटी बनाने पर विचार कर रहा है। जिसके सदस्य दोनों पक्षों की बात सुनेंगे और तब तक ये आंदोलन अहिंसक तरीके से जारी रह सकता है, लेकिन इस दौरान ना तो किसान हिंसा भड़का सकते हैं और न ही पुलिस ऐसा कुछ करेगी जिससे हिंसा भड़क जाए। पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि किसान अहंकारी सरकार से लड़ रहे हैं और उन्हें दिल्ली आने से रोका गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर इतनी बड़ी संख्या में लोग दिल्ली आ गए तो उन्हें नियंत्रित कैसे किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के प्रति हमदर्दी दिखाई, उन्हें आंदोलन जारी रखने की इजाजत दे दी, लेकिन ये शर्त भी लगा दी कि इसके नाम पर शहर को बंधक नहीं बनाया जा सकता और न ही हिंसा के लिए उकसाया जा सकता है, जबकि सरकार को कहा कि सरकार नए कृषि कानूनों को लेकर जल्दबाजी न करें।