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अच्छी खबर: लॉक डाउन के दौरान एम्स में ढाई लाख मरीजों को मिली ओपीडी की सुविधाएं 

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सत्येंद्र सिंह चौहान

ऋषिकेश,6 जनवरी।

कोरोना काल में लंबे समय तक चले लॉकडाउन के दौरान पिछले वर्ष एम्स ऋषिकेश ने ढाई लाख लोगों को स्वास्थ्य सम्बन्धी ओपीडी सुविधाएं प्रदान की हैं। इतना ही नहीं बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की प्रतिबद्धता दोहराते हुए एम्स ने इस दौरान 29 हजार से अधिक मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उनका समुचित इलाज भी किया।

विश्वव्यापी महामारी कोरोना के संक्रमण का खौफ इस कदर था कि राज्य के अधिकांश अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं भी बन्द हो गयीं थीं। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद एम्स ऋषिकेश ने महज कुछ दिनों के अवरोध के बाद अपनी ओपीडी और इमरजेन्सी सेवाओं को मरीजों की सुविधा के लिए निर्बाध रूप से जारी रखा। आपात्काल में अपना फर्ज निभाते हुए एम्स के डाक्टरों और नर्सिंग स्टाफ सहित अन्य सभी ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए योद्धाओं की भांति मरीजों की सेवा की।

एम्स अस्पताल प्रशासन के डीन प्रोफेसर यूबी मिश्रा ने बताया कि कोविड काल में उपचार की प्राथमिकता कोरोना के मरीजों के लिए निर्धारित की गयी थी, लेकिन अनिवार्य और इमरजेन्सी मरीजों का इलाज भी एम्स में चैबीसों घन्टे जारी रखा गया था। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष दिसम्बर 2020 तक ढाई लाख मरीज एम्स की ओपीडी में पहुंचे। इनमें से 29 हजार 299 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उनका समुचित इलाज किया गया। जबकि कोरोना काल की इसी समय अवधि में विभिन्न बीमारियों से ग्रसित 10 हजार मरीजों के ऑपरेशन भी सफलता पूर्वक किए गए। उल्लेखनीय है कि कोविड मरीजों के इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश को लेबल 3 श्रेणी में रिजर्व रखा गया था। इस श्रेणी में कोविड संक्रमित उन्हीं मरीजों का इलाज किया जाता है, जो गंभीर अवस्था के रोगी होते हैं और जिन्हें वेन्टिलेटर, ऑक्सीजन अथवा आईसीयू में रखे जाने की जरूरत पड़ती है। प्रोफेसर मिश्रा ने यह भी बताया कि एम्स की लैब में 1 लाख 20 हजार कोविड सैम्पलों की जांच की जा चुकी हैं। जबकि कोविड स्क्रीनिंग एरिया में अभी तक 46 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें से ढाई हजार कोविड पॉजिटिव मरीजों का उपचार कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ दिया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एम्स में कोरोना के 92 मरीजों का उपचार चल रहा है।